भारत-नेपाल सीमा(India-Nepal border) से जुड़े बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सुस्ता इलाके में एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। यह क्षेत्र लंबे समय से सीमा विवाद के कारण संवेदनशील माना जाता है। हाल ही में यहां सीमा संबंधी गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ गया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। एसएसबी की ओर से दर्ज शिकायत के अनुसार, नेपाल के सुस्ता गांव के करीब 150 से 200 ग्रामीण कथित रूप से भारतीय सीमा की ओर मिट्टी का बांध बनाने का काम कर रहे थे। एसएसबी ने इसे पहले से तय व्यवस्था का उल्लंघन बताया है।
SSB जवानों ने जब इस निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई और नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के अधिकारियों से बातचीत शुरू की तभी बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि भीड़ ने सुरक्षा बलों के काम में बाधा डाली और जवानों के साथ विवाद किया। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और ग्रामीणों की ओर से लाठी-डंडों व पत्थरों के साथ आक्रामक व्यवहार करने तथा भारतीय सीमा की ओर पथराव करने का आरोप लगाया गया। घटना के बाद वाल्मीकिनगर थाना में 150 से 200 अज्ञात नेपाली नागरिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
तीन दिन पहले हुई थी बैठक
एसएसबी के मुताबिक, 31 जुलाई को भारत और नेपाल के सुरक्षा अधिकारियों के बीच सुस्ता क्षेत्र को लेकर बैठक हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने सहमति बनाई थी कि अंतिम निर्णय होने तक इलाके में पहले जैसी स्थिति बनाए रखी जाएगी और कोई नया निर्माण नहीं किया जाएगा।एसएसबी का आरोप है कि इसके बावजूद बांध निर्माण शुरू किया गया।
क्या है सुस्ता विवाद?
सुस्ता भारत-नेपाल सीमा का एक पुराना विवादित इलाका है। गंडक यानी नारायणी नदी की बदलती धारा के कारण यहां सीमा निर्धारण को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। इसी वजह से इस क्षेत्र में किसी भी निर्माण या गतिविधि को लेकर दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां विशेष निगरानी रखती हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नेपाल की ओर से इस घटना पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।