Indian Economy : टैरिफ वॉर और दुनिया में जारी तनाव के चलते भले ही पिछले कुछ समय से 5 ट्रिलियन डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था की चर्चा कुछ कम हुई हो, लेकिन सरकार ने अपने लक्ष्य से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार भारत वित्तवर्ष 2028-29 तक 5.1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि वित्तवर्ष 2029 तक देश 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर लेगा।
IMF के अनुमान का दिया हवाला
वित्त मंत्री ने संसद में अप्रैल में जारी IMF की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तवर्ष 2028-29 तक 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। फिलहाल देश की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर है। सरकार का मानना है कि मौजूदा आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं के दम पर निर्धारित समय के भीतर यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
कई क्षेत्रों पर एक साथ फोकस
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार ने आर्थिक विकास के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। इसके तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने, MSME सेक्टर को समर्थन देने, बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी सुगमता में सुधार करने, इनकम टैक्स और GST सुधारों के जरिए अधिक प्रभावी टैक्स सिस्टम विकसित करने, इनोवेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
निवेश और व्यापार बढ़ाने पर जोर
वित्त मंत्री के अनुसार सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ाकर देश के भीतर नई परियोजनाओं को गति दे रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होने के साथ विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि FDI नियमों को सरल बनाया गया है। साथ ही निर्यात बढ़ाने, मैक्रो इकोनॉमी को मजबूत करने, मुक्त व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने और दूसरे देशों के साथ कारोबारी नेटवर्क मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे उत्पादन और निर्यात दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा सहारा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, मेक इन इंडिया, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम और पीएम गतिशक्ति जैसी योजनाएं लागू की गई हैं। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना है। उनका कहना था कि उत्पादन और मांग में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था का आकार भी लगातार बढ़ेगा।
MSME सेक्टर से मिलेगी रफ्तार
वित्त मंत्री ने कहा कि छोटे और मझोले उद्यमों यानी MSME सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए भी कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें गारंटी और इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम को बेहतर बनाना, MSME के वर्गीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव, निर्यात प्रोत्साहन, उद्यमों का आसान पंजीकरण और सरकारी ई-मार्केट प्लेस जैसी पहल शामिल हैं। सरकार का विश्वास है कि इन उपायों से MSME सेक्टर की क्षमता बढ़ेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षित गति मिलेगी।
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