Jagannath Puri Rath Yatra 2026 Secret: आज, गुरुवार से दुनिया की सबसे बड़ी श्री जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। हर साल ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली इस भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धापूर्वक इस रथ यात्रा में शामिल होता है, उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि इस यात्रा में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देवता, भूत-प्रेत और मुक्ति की इच्छा रखने वाली दूसरी कई अदृश्य शक्तियां भी शामिल होती हैं। इसी कारण रथ यात्रा के दौरान एक खास परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे अधर पाना कहा जाता है। साल 2026 में यह अनुष्ठान 26 जुलाई को होगा।
क्या होता है अधर पाना?
अधर पाना दो शब्दों से मिलकर बना है। अधर का अर्थ होता है होंठ और पाना का अर्थ होता है पेय पदार्थ। इस दिन भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए सफेद रंग का एक खास पेय तैयार किया जाता है। यह दूध, तुलसी, केला, कपूर, काली मिर्च, दालचीनी के साथ ही कई पवित्र सामग्रियों से मिलकर बनाया जाता है और देखने में खीर जैसा दिखाई देता है।
इस प्रसाद को कोई क्यों नहीं खाता?
अधर पाना को लेकर सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे न तो भक्त ग्रहण करते हैं और न ही पुजारी। भगवान को अर्पित करने के बाद इस पेय को रथ से नीचे सड़क पर बिखेर दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पेय केवल भगवान को समर्पित होता है और उसके बाद उन अदृश्य शक्तियों के लिए अर्पित कर दिया जाता है, जो इंसानी दुनिया से परे मानी जाती हैं।
अदृश्य शक्तियों से जुड़ी है मान्यता
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में देवताओं के साथ-साथ भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियां भी शामिल होती हैं, जो मुक्ति का मार्ग चाहती हैं। प्रकृति के संतुलन और इन शक्तियों की शांति के लिए अधर पाना का अनुष्ठान किया जाता है। इसी कारण इस पेय को किसी भी इंसान द्वारा ग्रहण करना गलत माना जाता है।
कैसे निभाई जाती है यह परंपरा?
अधर पाना का अनुष्ठान सामान्य भोग की तरह नहीं होता। यह विशेष पूजा प्रक्रिया रथ यात्रा के दसवें, ग्यारहवें और बारहवें दिन से जुड़ी मानी जाती है। इस दौरान मिट्टी के तीन विशेष पात्रों में अधर पाना भरकर तीनों रथों पर रखा जाता है। इन पात्रों को तैयार करने का काम महासूरा सेवक करते हैं। भगवान को यह पेय उनके होंठों से स्पर्श कराने के बाद रथ से नीचे गिरा दिया जाता है। इसके बाद इसे कोई भी छूता या ग्रहण नहीं करता।
अगर सड़क पर दिखे अधर पाना तो क्या करें?
रथ यात्रा के दौरान यदि सड़क पर सफेद रंग का यह पेय बिखरा हुआ दिखाई दे, तो उसे छूना या ग्रहण करना नहीं चाहिए। इसे सामान्य प्रसाद की तरह नहीं माना जाता, बल्कि अदृश्य शक्तियों को समर्पित अर्पण माना जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं को इस परंपरा का सम्मान करते हुए इससे दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का कार्यक्रम
वर्ष 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी। इसके बाद 20 जुलाई को हेरा पंचमी मनाई जाएगी। 24 जुलाई को बहुदा यात्रा यानी भगवान की वापसी यात्रा निकलेगी। 25 जुलाई को सुना बेशा का आयोजन होगा। 26 जुलाई को अधर पाना की खास परंपरा निभाई जाएगी, जबकि 27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे के साथ इस धार्मिक उत्सव का समापन होगा।
Disclaimer: खबर में दी गई बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित हैं। mhone News व्यक्तिगत रूप से इसका समर्थन नहीं करता है और न ही किसी घटना या लाभ-हानि की जिम्मेदारी लेता है।
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