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पंजाब में 69 सीटों वाली मालवा तय करती है सत्ता की चाबी, 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का समझिए पूरा गणित

पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नई चुनावी टीम का ऐलान कर दिया है। पहली नजर में यह बदलाव पार्टी को मजबूत करने की कोशिश लगता है, लेकिन तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। जहां एक तरफ कांग्रेस हाईकमान ने क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी भी साफ दिखाई दे रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। नई जिम्मेदारियां मिलने के बावजूद चरणजीत सिंह चन्नी खुश नहीं हैं। बता दें कि चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने समर्थकों की बैठक भी बुला ली है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। हालांकि केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी कांग्रेस की नई टीम पर तंज कसते हुए कहा कि जिन नेताओं ने चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए हाईकमान को चिट्ठियां लिखी थीं, अब वही नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ किस तरह काम करेंगे?

बता दें कि पंजाब की 117 विधानसभा सीटों और उसके तीन बड़े राजनीतिक क्षेत्रों मालवा, माझा और दोआबा में छिपा है।

 

पंजाब की राजनीति में सबसे बड़ी चाबी है मालवा

अगर पंजाब की राजनीति को समझना है, तो सबसे पहले मालवा को समझना होगा। पूरे राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र में आती हैं। यही वजह है कि पंजाब में अक्सर कहा जाता है कि जिसने मालवा जीत लिया, उसने पंजाब की सत्ता की चाबी हासिल कर ली।लोकसभा के लिहाज से भी मालवा सबसे बड़ा क्षेत्र है। यहां 8 लोकसभा सीटें आती हैं –

  • लुधियाना – अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, कांग्रेस (INC)

  • बठिंडा – हरसिमरत कौर बादल, शिरोमणि अकाली दल (SAD)

  • फिरोजपुर – शेर सिंह घुबया कांग्रेस (INC)

  • फरीदकोट – सरबजीत सिंह खालसा, निर्दलीय

  • श्री फतेहगढ़ साहिब – डॉ. अमर सिंह, कांग्रेस (INC)

  • पटियाला – डॉ. धर्मवीर गांधी, कांग्रेस (INC)

  • संगरूर – गुरमीत सिंह मीत हेयर, आम आदमी पार्टी (AAP)

  • श्री आनंदपुर साहिब – मालविंदर सिंह कांग आम आदमी पार्टी (AAP)

इनमें कांग्रेस के पास लुधियाना, फिरोजपुर, श्री फतेहगढ़ साहिब और पटियाला जैसी अहम सीटें हैं। बठिंडा अकाली दल के पास है, संगरूर और आनंदपुर साहिब आम आदमी पार्टी के पास हैं, जबकि फरीदकोट से निर्दलीय सांसद सरबजीत सिंह खालसा जीतकर पहुंचे। यानी लोकसभा चुनाव ने यह जरूर दिखाया कि कांग्रेस मालवा में फिर से वापसी कर रही है, लेकिन विधानसभा का समीकरण इससे बिल्कुल अलग है।

विधानसभा की तस्वीर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती

2022 के विधानसभा चुनाव में मालवा की 69 सीटों में से 64 सीटें आम आदमी पार्टी ने जीत ली थीं। सिर्फ 1 सीट कांग्रेस, 1 सीट भाजपा और 1 सीट शिरोमणि अकाली दल के खाते में गई थी। यह आंकड़ा बताता है कि विधानसभा स्तर पर मालवा में आम आदमी पार्टी ने लगभग क्लीन स्वीप कर दिया था। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपनी पूरी चुनावी रणनीति का केंद्र मालवा को बनाया है।

माझा में 3 लोकसभा सीटें

माझा में 25 विधानसभा और 3 लोकसभा सीटें आती हैं –

  • अमृतसर – गुरजीत सिंह औजला, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)

  • गुरदासपुर – सुखजिंदर सिंह रंधावा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)

  • श्री खडूर साहिब – अमृतपाल सिंह, निर्दलीय

2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजे देखें तो माझा की 25 में से 22 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। भाजपा को 2 और कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली, जबकि अकाली दल भी सीमित दायरे में सिमट गया। यानी कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ भी उसके हाथ से निकल गया। यही वजह है कि हर राजनीतिक दल इस क्षेत्र में सिर्फ संगठन नहीं, बल्कि रणनीतिक नेतृत्व को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

दोआबा में दो लोकसभा सीटें

  • जालंधर – चरणजीत सिंह चन्नी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)

  • होशियारपुर – डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, आम आदमी पार्टी (AAP)

अब बात दोआबा की, जिसे पंजाब की राजनीति का सबसे अलग और सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां 23 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटें हैं। जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला वाला यह इलाका बड़ी संख्या में NCR आबादी और पंजाब के सबसे बड़े दलित वोट बैंक के लिए जाना जाता है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आप ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया। जालंधर से चरणजीत सिंह चन्नी, होशियारपुर से राज कुमार चब्बेवाल जीते और होशियारपुर से डॉ. राज कुमार चब्बेवाल जीतकर संसद पहुंचे।

2022 के चुनाव में दोआबा की 23 में से 17 सीटें आम आदमी पार्टी के खाते में गई थीं। कांग्रेस को सिर्फ 5 सीटें और अकाली दल को 1 सीट मिली थी। यानी लोकसभा और विधानसभा के नतीजों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

पंजाब में जातीय समीकरण

पंजाब में करीब 31 प्रतिशत दलित आबादी है, जो किसी भी पार्टी की जीत-हार तय करने की क्षमता रखती है। यही वजह है कि सभी पार्टीयां इस बार दलित नेतृत्व को पहले से कहीं ज्यादा महत्व दिया है। हलांकि दलित कार्ड खेलने के साथ-साथ सभी राजनीतिक पार्टियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पंजाब की सत्ता की धुरी माने जाने वाले जट्ट सिख समुदाय की नाराजगी न बढ़े। पंजाब के बड़े शहरों में हिंदू मतदाताओं का प्रभाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Ram Janam Chauhan
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राम जनम चौहान वर्तमान में MH One News के साथ जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से पॉलिटिक्स और नेशनल न्यूज़ को कवर करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण संस्थान के साथ की। इसके अलावा Zee Media और India News में इंटर्नशिप की है। राम जनम चौहान ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज (गोकलपुरी, दिल्ली) से पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है।
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