केंद्र सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी के कार्यकाल में एक वर्ष का विस्तार कर दिया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने बुधवार को जारी आदेश में उनके सेवा विस्तार को मंजूरी दी। पहले उनका कार्यकाल 14 जुलाई 2026 को समाप्त होने वाला था, जिसे अब बढ़ाकर 14 जुलाई 2027 तक कर दिया गया है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विक्रम मिसरी का सेवा विस्तार FR 56(D) के प्रावधानों के तहत किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
कौन हैं विदेश सचिव विक्रम मिसरी?
विक्रम मिसरी भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं और तीन दशक से अधिक का लंबा कूटनीतिक अनुभव रखते हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान डेस्क पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ पूर्व विदेश मंत्रियों आई.के. गुजराल और प्रणब मुखर्जी के स्टाफ में भी काम किया है। वे भारत के तीन प्रधानमंत्रियों—आई.के. गुजराल, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—के निजी सचिव भी रह चुके हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में संयुक्त सचिव और बाद में उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (रणनीतिक मामले) के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
कई देशों में निभाई अहम जिम्मेदारियां
अपने कूटनीतिक करियर के दौरान विक्रम मिसरी ब्रुसेल्स, ट्यूनिस, इस्लामाबाद और वॉशिंगटन डी.सी. स्थित भारतीय मिशनों में तैनात रहे। इसके अलावा वे श्रीलंका में उप उच्चायुक्त, म्यूनिख में महावाणिज्यदूत तथा स्पेन, म्यांमार और चीन में भारत के राजदूत के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने जनवरी 2019 से दिसंबर 2021 तक चीन में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जन्मे विक्रम मिसरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा श्रीनगर और उधमपुर में प्राप्त की। उन्होंने द सिंधिया स्कूल, ग्वालियर से स्कूली शिक्षा पूरी की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल की।

