दिल्ली(Delhi) के O-Zone क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र में बने मौजूदा आवासीय मकानों पर किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी। एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं और अदालत से भी जरूरी अनुमति प्राप्त हो चुकी है।
CM रेखा के इस बयान के बाद उन परिवारों की चिंता काफी हद तक कम हो गई है जो लंबे समय से अपने घरों के भविष्य को लेकर असमंजस में थे। माना जा रहा है कि इस फैसले का लाभ लगभग 15 लाख लोगों को मिलेगा।
O-Zone को लेकर क्यों बढ़ा था विवाद?
O-Zone दिल्ली के उन इलाकों को कहा जाता है जो यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र और उसके आसपास स्थित हैं। दिल्ली मास्टर प्लान के तहत इन क्षेत्रों को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी ताकि राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा मिल सके।
हालांकि समय के साथ इन इलाकों में बड़ी संख्या में आवासीय बस्तियां और कॉलोनियां विकसित हो गईं। इसके बाद पर्यावरणीय नियमों और भूमि उपयोग को लेकर विवाद शुरू हुआ जिसने धीरे-धीरे कानूनी रूप ले लिया।
O-Zone के दायरे में आती हैं कितनी कॉलोनियां ?
सरकारी और न्यायिक दस्तावेजों के अनुसार O-Zone क्षेत्र में 40 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां शामिल हैं। इनमें यमुना किनारे और पुश्ता रोड के आसपास बसे कई घनी आबादी वाले इलाके भी आते हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी 10 से 15 लाख के बीच आंकी जाती है इसलिए यहां किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का सीधा असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ता है।
कोर्ट और एनजीटी तक कैसे पहुंचा मामला?
यमुना के बाढ़ क्षेत्र में बढ़ते निर्माण को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कई याचिकाएं विभिन्न न्यायिक मंचों पर दायर की गई थीं याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने समय-समय पर सख्त रुख अपनाया और संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
बाद में मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुंचा। इन्हीं कानूनी प्रक्रियाओं के कारण O-Zone की कॉलोनियों पर तोड़फोड़ की आशंका बनी हुई थी। अब दिल्ली सरकार के ताजा रुख और CM रेखा के आश्वासन के बाद इन इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, भविष्य में क्षेत्र की कानूनी और पर्यावरणीय स्थिति को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रियाओं और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।