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CBSE ने स्वीकारी सुरक्षा चूक, 12वीं की आंसर कॉपियों के डाटा ब्रीच पर बवाल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं के बीच अब उत्तर पुस्तिकाओं के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कुछ साइबर विशेषज्ञों और छात्रों द्वारा यह दावा किया गया कि उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सकती थी जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

हालांकि बोर्ड लंबे समय तक ऐसे दावों को खारिज करता रहा लेकिन हाल ही में उसने अपने सेवा प्रदाता के पोर्टल में कुछ तकनीकी कमियों की मौजूदगी स्वीकार की है। इस स्वीकारोक्ति के बाद परीक्षा प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता पर चर्चा तेज हो गई है।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

इस वर्ष सीबीएसई ने 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का उपयोग किया था। इस प्रक्रिया में परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध कराई जाती हैं जिनका मूल्यांकन ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाना था। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इस तकनीक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

CBSE ने क्या कहा?

रविवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में जिन तकनीकी कमजोरियों की पहचान की गई थी उन्हें दूर कर दिया गया है। बोर्ड के अनुसार, संभावित जोखिमों को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।

सीबीएसई ने यह भी बताया कि साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों की टीम सिस्टम का मूल्यांकन कर रही है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती से बचा जा सके।

पाई गई कमियों में किया सुधार

दिलचस्प बात यह है कि जिन साइबर विशेषज्ञों और छात्रों ने पोर्टल में संभावित सुरक्षा खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था उनके दावों को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया था। लेकिन अब बोर्ड ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि जिन कमियों की ओर इशारा किया गया था उनकी जांच की गई और उनमें सुधार भी किया गया।

इस घटनाक्रम को कई लोग डिजिटल पारदर्शिता और जिम्मेदार तकनीकी निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बाहरी विशेषज्ञों द्वारा की गई समीक्षा कई बार संस्थाओं को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद कर सकती है।

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