बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के सामने एक नया युद्धविराम प्रस्ताव रखा। इससे पहले रक्षा सचिव हेगसेथ और जनरल डैन केन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान न्यूज़मैक्स के एक रिपोर्टर ने हेगसेथ से कहा कि ट्रंप ने ईरान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पत्रकार ने अपने इस दावे के समर्थन में सबूत भी पेश किए, रिपोर्टर के अनुसार, 28 फरवरी को ट्रंप ने एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि अमेरिका जल्द ही ईरान में सत्ता को उखाड़ फेंकेगा। उन्होंने नागरिकों से ऐसी स्थिति के लिए तैयार रहने का आग्रह किया था।
7 मार्च को, ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ शांति को लेकर कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि ईरान को बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण करना होगा। हालाँकि, 7 अप्रैल को ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा कर दी और ऐसा उन्होंने बिना किसी ठोस बातचीत के ही किया। 6 मई को मार्को रूबियो ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के समापन की घोषणा की यह कदम भी बिना किसी औपचारिक समझौते पर पहुँचे ही उठाया गया था। इन्हीं तर्कों का हवाला देते हुए रिपोर्टर ने दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। हेगसेथ ने रिपोर्टर के सवाल पर जोर देकर कहा कि ट्रंप ने ‘किसी भी बात पर हार नहीं मानी है.’
अमेरिका ने एक और शांति प्रस्ताव भेजा
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दावा करते हैं कि उन्होंने ईरान को घुटनों पर ला दिया है वहीं दूसरी तरफ वह किसी समझौते पर पहुँचने की कोशिश में ईरान को लगातार नए प्रस्ताव भेजते रहते हैं। बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान को एक और प्रस्ताव भेजा जिसमें संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज़ को फिर से खोलने की शर्तें बताई गई थीं। अमेरिका ने ईरान को इस प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए 48 घंटे का समय दिया है। इस प्रस्ताव के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन फ्रीडम को भी स्थगित कर दिया है यह अमेरिकी सेना की एक पहल थी जिसका उद्देश्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था। ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोक दिया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या तेहरान के साथ कोई ठोस समझौता हो सकता है।
क्या ईरान अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा?
शांति वार्ता की इन कोशिशों की शुरुआत से ही ईरान ने अपनी मुख्य मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। अब सभी की नज़रें इस ताज़ा प्रस्ताव पर टिकी हैं खासकर इसलिए क्योंकि ईरान ने पहले भी अमेरिका के पिछले प्रस्तावों को ठुकरा दिया था और उन्हें बिना किसी शर्त के स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अमेरिका के प्रस्ताव के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि अमेरिका अधिकतम दबाव की नीति अपना रहा है, और यह उम्मीद कर रहा है कि ईरान उसकी एकतरफ़ा मांगों के आगे झुक जाएगा जो कि तेहरान के लिए एक असंभव बात है।