मुंबई में एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौतों ने एक नया मोड़ ले लिया है। अब जाँचकर्ता तरबूज़ से होने वाली फ़ूड पॉइज़निंग के शुरुआती शक से हटकर, किसी ज़हरीले पदार्थ के होने की संभावना पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
मौतों का कारण फल नहीं
शुरुआती रिपोर्टों में इन मौतों का संबंध तरबूज़ खाने से जोड़ा गया था, जिससे शहर के कुछ हिस्सों में दहशत फैल गई थी और फलों की बिक्री में भारी गिरावट आ गई थी। फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की जाँच के अनुसार, परिवार द्वारा खाए गए तरबूज़ के नमूनों में कोई भी हानिकारक मिलावट या संदूषण नहीं पाया गया। इससे यह बात काफ़ी हद तक साफ़ हो गई है कि इन मौतों का सीधा कारण यह फल नहीं था।
FDA अधिकारियों ने कहा, “तरबूज़ का रंग, मिठास या आकार बढ़ाने के लिए उसमें कोई भी कृत्रिम रंग या रसायन नहीं मिलाया गया था।”
यह मामला 27 अप्रैल का है, जब अब्दुल्ला डोकाडिया (40), उनकी पत्नी नसीम (35), और उनकी बेटियाँ आयशा (16) और ज़ैनब (13) ने घर पर एक छोटी सी दावत के बाद, बिरयानी वाले खाने के साथ तरबूज़ खाया था। रिश्तेदारों ने बताया कि इस मौसमी फल को खाने के कुछ ही देर बाद चारों को उल्टियाँ होने लगीं और वे अर्द्ध-बेहोशी की हालत में चले गए। जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
मॉर्फ़ीन के अंश मिलने से शक गहराया
अब जाँचकर्ता ज़हर दिए जाने की संभावना की जाँच कर रहे हैं, क्योंकि फ़ॉरेंसिक जाँच में मृतकों के शरीर में मॉर्फ़ीन जो कि एक तेज़ दर्द निवारक दवा है उसके के अंश पाए गए हैं।
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