पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, और इसके चलते इस्लामाबाद को एक तरह से किले में बदल दिया गया था। लेकिन, अब जो खबर सामने आई है, उसने पाकिस्तान की इन तमाम बड़ी तैयारियों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। ईरान ने पाकिस्तान आने पर सहमति जताने से पहले एक शर्त रख दी है, उसने साफ-साफ कह दिया है कि अमेरिकी नौसेना को सबसे पहले अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी पक्ष ने यह साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक पाकिस्तान में कोई भी प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा जाएगा।
जहाँ से शुरू किया था, वहीं वापस
यह मामला ठीक उसी जगह आकर अटक गया है, जहाँ से यह पूरा संकट असल में शुरू हुआ था यानी होर्मुज की नाकेबंदी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बात पर अड़े हुए हैं कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान के साथ कोई 100% पुख्ता समझौता नहीं हो जाता। ट्रंप ने तो यहाँ तक दावा कर दिया है कि इस नाकेबंदी की वजह से ईरान को हर दिन 40 अरब रुपये (40 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हो रहा है। अब, ईरान ने भी उतनी ही सख्ती से जवाब देते हुए ऐलान किया है, “जब तक आप समुद्र से अपने जंगी जहाज वापस नहीं बुला लेते, तब तक हम भी बातचीत की मेज पर आने से इनकार करते हैं।”
पाकिस्तान की ‘दोहरी बेइज्जती
दुनिया की नज़र में अपनी छवि चमकाने के लिए, पाकिस्तान ने पाँच सितारा होटलों को खाली करवा दिया, बस टर्मिनल बंद कर दिए, और आम जनता को एक तरह से उनके घरों में ही कैद कर दिया। दूसरी तरफ से, अमेरिका ने भी पाकिस्तान को एक करारा झटका दिया, ट्रंप ने साफ कह दिया कि पाकिस्तान एक सुरक्षित जगह नहीं है, और इसलिए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस वहाँ का दौरा नहीं करेंगे और अब, ईरान ने भी अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने अपनी वैश्विक साख को चमकाने के लिए जिस कूटनीतिक तमाशे को इतनी मेहनत से रचा था, वह शो शुरू होने से पहले ही ढह गया।
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