इजरायल-ईरान युद्ध में करीब एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। इस बीच इजरायल ने ऐसा कदम उठाया है कि 16 मुस्लिम देशों ने कड़ा विरोध जताया है। इसमें कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की समेत 16 अरब देश शामिल हैं। इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने शनिवार 18 अप्रैल 2026 को दोहा में संयुक्त बयान जारी कर सोमालीलैंड में इजरायल द्वारा राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने की कड़ी निंदा की है। देशों ने कहा कि यह कदम सोमालिया संघीय गणराज्य की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया फैसला
संयुक्त बयान में कहा गया कि इजरायल का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के उलट है। विदेश मंत्रियों ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई खतरनाक मिसाल बन सकती है और अन्य क्षेत्रों में भी अस्थिरता को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने दोहराया कि सिर्फ सोमालिया की वैध सरकारी संस्थाएं ही वहां की जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
कुल 16 देशों ने जताया विरोध
इजरायल द्वारा उठाए इस कदम की कुल 16 मुस्लिम देशों ने विरोध किया है। जिसमें कतर, कुवैत, सऊदी अरब, मिस्र, सोमालिया, सूडान, लीबिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, तुर्की, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मॉरिटानिया, जॉर्डन और ओमान शामिल है। सभी देशों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसे एकतरफा कदम को स्वीकार नहीं करेंगे जो किसी राष्ट्र की एकता और सीमाओं को कमजोर करता हो।
हॉर्न ऑफ अफ्रीका में बढ़ सकता है तनाव
विदेश मंत्रियों ने कहा कि यह फैसला अफ्रीकी संघ के संविधान अधिनियम की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर शांति और सुरक्षा पर पड़ेगा। संयुक्त बयान में 16 देशों ने सोमालिया की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि सोमालिया की सीमाओं और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान किया जाए।
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