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महिला आरक्षण बिल पर गरमाई राजनीति, अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना, 2029 तक लागू करने का दावा

लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का विरोध इस बिल के प्रावधानों का नहीं, बल्कि महिला आरक्षण के विचार का है। शाह ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2029 तक महिला सशक्तिकरण के वादे को सरकार पूरा करेगी और 2029 के लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही होंगे।

बिल पास कराने में एनडीए के सामने चुनौती

महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए एनडीए को लोकसभा में कठिन संख्याबल की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जो कुल सदन का लगभग 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय और छोटे दलों की भूमिका भी इस समीकरण में निर्णायक मानी जा रही है।

दो-तिहाई बहुमत की गणित

संवैधानिक संशोधन के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। यदि सभी 540 सदस्य उपस्थित रहते हैं, तो यह आंकड़ा 360 तक पहुंचता है। वहीं, अनुपस्थिति की स्थिति में यह गणित बदल सकता है। उदाहरण के तौर पर 30 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर बहुमत का आंकड़ा 340, 60 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर 320 और 90 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर यह 300 तक आ सकता है।

विपक्षी दलों की भूमिका अहम

बिल को पारित कराने के लिए एनडीए को विपक्षी दलों के समर्थन या उनकी अनुपस्थिति पर निर्भर रहना पड़ सकता है। समाजवादी पार्टी के 37 सांसद, तृणमूल कांग्रेस के 28 और डीएमके के 22 सांसद इस समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस के 98 सांसद भी इस प्रक्रिया में निर्णायक प्रभाव डाल सकते हैं।

राज्यसभा में भी समान चुनौती

यदि यह विधेयक लोकसभा में पारित होता है, तो इसे राज्यसभा में भी दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। राज्यसभा में एनडीए के पास 141 सदस्य हैं, जबकि विपक्ष के पास 83 सदस्य हैं। यहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा, जिसमें बीजेडी, वाईएसआरसीपी, बीएसपी और निर्दलीय सांसदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्षेत्रीय दलों की प्रतिक्रिया

इसी बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए 131वें संविधान संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य के हितों की रक्षा के लिए अपने सांसदों से एकजुट रहने की अपील भी की है।

 

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