नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश के बाद देश में नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने भारत से लगने वाली सीमा शुल्क चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी है और निर्देश दिए हैं कि भारत से आने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य रूप से कस्टम ड्यूटी वसूली जाए। इस कदम के बाद सीमा क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है।
स्थानीय व्यापार और राजस्व बचाने का दावा
नेपाल प्रशासन का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों के लोग अक्सर खाने-पीने का सामान, कपड़े और अन्य घरेलू वस्तुएं भारत से खरीदते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को नुकसान होता है और राजस्व पर भी असर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्ती लागू की गई है, जिससे भारतीय बॉर्डर के पास स्थित बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
भारतीय गाड़ियों पर भी सख्ती शुरू
इसके अलावा नेपाल के मधेश प्रांत में भारत में रजिस्टर्ड वाहनों की आवाजाही पर भी रोक और सख्ती बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इन वाहनों का बिना अनुमति उपयोग किया जा रहा था। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है और नेपाल की कई पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
राजनीतिक दलों का विरोध और मांग
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, CPN-UML, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने संयुक्त बयान जारी कर इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि पहले की तरह भारत में रजिस्टर्ड वाहनों को सीमा के 30 किलोमीटर के दायरे में बिना बाधा चलने दिया जाना चाहिए, क्योंकि सख्त नियमों से दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
अधिकारियों का कानून लागू करने का दावा
नेपाल प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल कानून को सख्ती से लागू करने के लिए उठाया गया है। सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के अनुसार बिना कस्टम ड्यूटी के वाहन चलाना गैरकानूनी है और अब नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पहले लोग एक दिन का टैक्स देकर लंबे समय तक वाहन चलाते थे, जिसे अब रोका जाएगा।
हजारों भारतीय गाड़ियों का अनुमान
सुरक्षा एजेंसियों के अनुमान के अनुसार मधेश प्रांत के आठ जिलों में 10,000 से अधिक भारत में रजिस्टर्ड वाहन चल रहे हैं। सीमा क्षेत्रों में लोग अक्सर ज्यादा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहन खरीदते हैं, जिससे अब नए नियमों के चलते स्थिति बदल सकती है।
यह कदम नेपाल-भारत सीमा क्षेत्रों में व्यापार, आवाजाही और रिश्तों पर असर डाल सकता है, जिसे लेकर दोनों तरफ चर्चा तेज हो गई है।
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