पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच राहत की खबर सामने आई है। इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी है। यह समझौता कई हफ्तों से चल रही हिंसा के बाद आया है, जिससे क्षेत्र में फिलहाल तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ट्रंप की पहल से बनी सहमति
इस सीजफायर के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से फोन पर बातचीत की, जिसके बाद इस अस्थायी शांति समझौते की घोषणा की गई।
ईरान की शर्त बनी थी अड़चन
सीजफायर का मुद्दा पहले ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में भी सामने आया था। लेबनान के साथ संघर्ष रोकना ईरान की प्रमुख शर्त थी, जिसे लेकर पहले सहमति नहीं बन पाई थी। इसी वजह से शांति वार्ता भी टूट गई थी।
तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि सीजफायर की घोषणा हो चुकी है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। पिछले 24 घंटों में हिजबुल्लाह ने इजरायली ठिकानों पर 39 सैन्य हमले किए हैं। संगठन का कहना है कि जब तक इजरायली सेना लेबनान की जमीन नहीं छोड़ती, तब तक वह पीछे नहीं हटेगा।
शांति लेकिन शर्तों के साथ
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों पर। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह को पूरी तरह निष्क्रिय करना जरूरी है। उन्होंने ‘बिंत जबील’ जैसे प्रमुख ठिकानों को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया है।
कूटनीतिक प्रयास जारी
अमेरिका की ओर से भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की। लेबनान ने इस पहल के लिए अमेरिका का आभार भी जताया है।
अस्थायी राहत, स्थायी समाधान बाकी
कुल मिलाकर 10 दिनों का यह सीजफायर फिलहाल राहत जरूर दे सकता है, लेकिन स्थायी शांति की राह अभी आसान नहीं दिख रही। दोनों पक्षों के सख्त रुख और जमीनी तनाव को देखते हुए आने वाले दिन इस समझौते की सफलता तय करेंगे।
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