पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार वैश्विक नेताओं का संपर्क तेज हो गया है। 48 घंटे के भीतर पहले डोनाल्ड ट्रंप और फिर इमैनुएल मैक्रों ने फोन पर उनसे अहम बातचीत की, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कूटनीतिक हलचल के संकेत मिल रहे हैं।
होर्मुज पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई बातचीत का मुख्य मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समुद्री रास्तों की आजादी रहा। दोनों नेताओं ने इस अहम समुद्री मार्ग में बढ़ते खतरे पर चिंता जताई और इसे सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण भारत और फ्रांस ने मिलकर क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत की बढ़ती भूमिका
मैक्रों ने इस संकट के समाधान में भारत की भूमिका को अहम बताया और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की। लगातार हो रहे इन उच्चस्तरीय संपर्कों से संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो रही है।
48 घंटे में दूसरी बड़ी बातचीत
इससे पहले 14 अप्रैल को डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत की थी। उस दौरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया गया था। लगातार दो बड़ी शक्तियों का भारत से संपर्क करना इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
शांति दूत की भूमिका में भारत
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा हालात में दुनिया पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को रोकने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए भारत की ओर देख रही है। प्रधानमंत्री मोदी एक संतुलित और संवाद आधारित कूटनीति के जरिए शांति कायम करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
आगे और बढ़ सकती है कूटनीतिक पहल
कुल मिलाकर, ट्रंप और मैक्रों के बैक-टू-बैक फोन कॉल्स यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए वैश्विक स्तर पर नई रणनीति तैयार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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