अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है, लेकिन इसी बीच ईरान की विदेशों में फंसी भारी संपत्ति का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। यह वही पैसा है जो कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण विभिन्न देशों में रुका हुआ है।
क्या होती है जमी हुई संपत्ति
“फ्रोजन एसेट” यानी जमी हुई संपत्ति वह होती है, जब किसी देश, संस्था या व्यक्ति की संपत्ति को दूसरे देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा रोक दिया जाता है। इस स्थिति में मालिक उस संपत्ति का उपयोग या लेन-देन नहीं कर सकता। आमतौर पर यह कदम प्रतिबंधों, कानूनी आदेशों या सुरक्षा कारणों से उठाया जाता है।
100 अरब डॉलर से ज्यादा फंसी रकम
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की विदेशों में 100 अरब डॉलर से अधिक संपत्ति फंसी हुई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राशि ईरान की एक साल की तेल आय से लगभग तीन गुना है, जिससे इसकी अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
1979 से शुरू हुआ विवाद
ईरान की संपत्ति फ्रीज होने का मामला 1979 में शुरू हुआ, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने सुरक्षा चिंताओं के चलते यह कदम उठाया। उस समय तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में 66 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया था। 1981 में समझौते के बाद कुछ संपत्ति वापस की गई, लेकिन इसके बाद भी दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने रहे।
परमाणु कार्यक्रम बना कारण
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान पर कई बार आरोप लगाया कि वह परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम संवर्धन कर रहा है। इसी कारण उस पर लगातार आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, जिससे उसकी विदेशी संपत्तियां और ज्यादा फ्रीज होती चली गईं।
कई देशों में फंसा ईरान का पैसा
ईरान की संपत्ति जापान, इराक, चीन, भारत, अमेरिका, यूरोप और कतर जैसे देशों में फंसी हुई है। इनमें चीन में सबसे ज्यादा, जबकि भारत में भी अरबों डॉलर की राशि रुकी हुई बताई जाती है।
ईरान के लिए क्यों जरूरी है यह पैसा
लगातार प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है। तेल निर्यात में गिरावट और विदेशी निवेश की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। ऐसे में यह फंसी हुई संपत्ति देश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका के सामने चुनौती
ईरान की संपत्ति लौटाना डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए आसान नहीं माना जाता। अमेरिकी नेताओं का मानना है कि अगर यह पैसा ईरान को मिल गया, तो वह अपनी सैन्य ताकत बढ़ा सकता है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित होगा।
बातचीत में बड़ा रोड़ा बन सकता है मुद्दा
कुल मिलाकर ईरान की फंसी संपत्ति का मामला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाली वार्ताओं में यह विषय अहम भूमिका निभा सकता है और दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकता है।
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