पश्चिम एशिया में होर्मुज जलसंधि और ईरान संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। बातचीत करीब 40 मिनट तक चली, जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात और सैन्य गतिरोध पर गंभीर चर्चा की।
दोनों नेताओं की तीसरी टेलीफोनिक बातचीत
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस उच्चस्तरीय वार्ता की पुष्टि की। बताया गया कि यह वार्ता इस साल पीएम मोदी और ट्रंप के बीच तीसरी टेलीफोनिक बातचीत है। वार्ता ऐसे समय में हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।
अस्थायी युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार
हालांकि इस समय 22 अप्रैल तक के लिए अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन इस्लामाबाद में हुई पिछली वार्ता बेनतीजा रहने के कारण सैन्य गतिरोध अभी भी जारी है। दोनों नेताओं ने इस गतिरोध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
रणनीतिक और कूटनीतिक समाधान पर जोर
बातचीत में ट्रंप ने इस क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान निकालने और सैन्य तनाव को कम करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर अपनी दृष्टि साझा की। वार्ता में रणनीतिक विकल्पों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की संभावना पर चर्चा हुई।
वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलसंधि में तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर असर डाल सकता है। भारत और अमेरिका की यह बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा निर्यात और वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दोनों नेताओं ने कहा कि बातचीत का उद्देश्य सैन्य संघर्ष से बचना और संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। अमेरिकी और भारतीय अधिकारी इस वार्ता के परिणामों को देखते हुए अगले कूटनीतिक कदमों पर काम कर रहे हैं।
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