US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अहम शांति वार्ता होने जा रही है। लेकिन इस बातचीत से पहले ही ईरान ने एक भावनात्मक और सख्त संदेश दिया है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ इस्लामाबाद रवाना होते समय अपने साथ मीनाब हमले में मारे गए बच्चों के खून से सने बैग और जूते लेकर पहुंचे, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है।
मीनाब हमले का दर्द लेकर पहुंचे गालिबाफ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गालिबाफ अपनी यात्रा के दौरान उन बच्चों की तस्वीरों को देखते रहे, जो 28 फरवरी को ईरान के मीनाब शहर में हुए हमले में मारे गए थे। इस हमले में एक गर्ल्स स्कूल को निशाना बनाया गया था, जिसमें 168 बच्चियों की जान चली गई थी। हमले के बाद सामने आई तस्वीरों में तबाही का भयावह मंजर दिखा था, खून से सनी जमीन, बिखरे स्कूल बैग और जूते, और हर तरफ चीख-पुकार।
अमेरिका-इजरायल पर लगा आरोप
ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह हमला ईरान की अपनी गलती भी हो सकता है, क्योंकि उनके हथियार निशाने पर सटीक नहीं बैठते। अमेरिकी पक्ष का यह भी कहना रहा कि उनका लक्ष्य स्कूल नहीं, बल्कि पास स्थित सैन्य ठिकाना था।
शांति वार्ता पर असर डाल सकती हैं पुरानी घटनाएं
मीनाब हमले की यह घटना ईरान के लिए गहरा घाव बन चुकी है और इसका असर इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर भी पड़ सकता है। गालिबाफ का यह कदम संकेत देता है कि ईरान इस मुद्दे को बातचीत के दौरान उठाने की तैयारी में है। ऐसे में यह वार्ता सिर्फ कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक दबावों के बीच होने वाली जटिल प्रक्रिया बन गई है।
همراهان من در این پرواز#Minab168 pic.twitter.com/xvXmDlSDiF
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 10, 2026
पाकिस्तान में होगी अहम बैठक
इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाना है। पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, मौजूदा हालात और हालिया घटनाओं को देखते हुए यह साफ है कि बातचीत आसान नहीं होने वाली।
क्या मिल पाएगा समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देश आपसी मतभेदों को किनारे रखकर बातचीत करते हैं तो समाधान निकल सकता है, लेकिन मीनाब जैसे हमलों की ताजा यादें शांति की राह में बड़ी बाधा बन सकती हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह वार्ता तनाव कम कर पाएगी या फिर पुराने जख्म एक बार फिर हालात को बिगाड़ देंगे।
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