जब भी ऐसा लगता है कि कोविड-19 अब रोजमर्रा की जिंदगी से धीरे-धीरे पीछे हट गया है, तभी एक नया वेरिएंट वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। हाल ही में Covid-19 का एक नया वेरिएंट BA.3.2 सामने आया है, जिसमें असामान्य रूप से अधिक म्यूटेशन पाए गए हैं। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स इस वेरिएंट पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं, क्योंकि यह कई देशों में धीरे-धीरे फैलता हुआ दिखाई दे रहा है।
हालिया सर्विलांस रिपोर्ट के अनुसार, BA.3.2 वेरिएंट अब अमेरिका के आधे हिस्सों में और कम से कम 22 अन्य देशों में दर्ज किया जा चुका है। हालांकि अभी तक इसे अत्यधिक घातक घोषित नहीं किया गया है, लेकिन इसकी तेज़ी से फैलने की क्षमता और अधिक म्यूटेशन संख्या ने वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया है।
इस वेरिएंट को दिया Cicada नाम
रिसर्चर्स ने इस नए वेरिएंट को अनौपचारिक रूप से “Cicada” नाम दिया है। Cicada एक ऐसा कीड़ा होता है जो लंबे समय तक जमीन के नीचे छिपा रहता है और फिर अचानक बाहर निकलता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नाम इस संभावना को दर्शाता है कि यह वायरस निगरानी प्रणालियों की नजर से दूर रहते हुए धीरे-धीरे विकसित हो सकता था और बाद में अचानक सामने आया।
शुरुआती विश्लेषणों से पता चलता है कि BA.3.2 में लगभग 75 म्यूटेशन मौजूद हैं, जो पिछले कई वेरिएंट्स की तुलना में कहीं अधिक हैं। यही कारण है कि इसे लेकर वैश्विक स्तर पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
क्या हैं इस वेरिएंट के संभावित लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस वेरिएंट से जुड़े लक्षण सामान्य वायरल या फ्लू जैसे ही हो सकते हैं। इनमें अचानक बुखार और ठंड लगना शुरुआती संकेत माने जा रहे हैं। इसके अलावा सूखी खांसी, गले में खराश या जलन, अत्यधिक थकान और शरीर में कमजोरी भी आम लक्षणों में शामिल हैं।
कुछ मामलों में लगातार सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत भी देखी गई है। वहीं, कुछ लोगों को मितली, पेट से जुड़ी समस्याएं या भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय पर जांच कराना जरूरी है।
पहली बार कब सामने आया था BA.3.2 वेरिएंट
वैज्ञानिकों के अनुसार, BA.3.2 वंश का पता सबसे पहले नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में लिए गए एक श्वसन नमूने में चला था। इसके बाद कई महीनों तक यह वेरिएंट जीनोमिक डेटाबेस में बहुत कम दिखाई दिया। लेकिन 2025 और 2026 की शुरुआत में यह धीरे-धीरे विभिन्न क्षेत्रों की निगरानी प्रणालियों में सामने आने लगा।
प्रयोगशाला अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि इस वेरिएंट में इम्यून एस्केप यानी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने की क्षमता बढ़ सकती है। इसका मतलब यह है कि पहले से लगाई गई वैक्सीन या पिछले संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज़ इस वायरस के खिलाफ कम प्रभावी हो सकती हैं, हालांकि अभी इस पर विस्तृत अध्ययन जारी हैं।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। नियमित रूप से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और संतुलित आहार लेकर इम्युनिटी मजबूत रखना अभी भी सबसे प्रभावी उपाय हैं। यदि किसी व्यक्ति में बुखार, खांसी या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और बिना सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर नया वेरिएंट खतरे की घंटी नहीं होता, लेकिन समय रहते सावधानी बरतना ही संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।
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