दिल्ली अब सिर्फ सत्ता और सियासत की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी । राजधानी तेजी से मनोरंजन और सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में फिल्म सिटी प्रोजेक्ट एक बड़ा कदम साबित हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में दिल्ली के सांस्कृतिक और आर्थिक नक्शे को बदलने की क्षमता रखता है।
486 एकड़ जमीन प्रस्तावित
करीब 486 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित इस फिल्म सिटी का सपना अब कागजों से निकलकर वास्तविकता की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच सहयोग इस महत्वाकांक्षी योजना को मजबूती दे रहा है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो भविष्य में दिल्ली भी मुंबई की तरह फिल्म निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकती है।
इस प्रोजेक्ट से न केवल बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही, दिल्ली की पहचान को एक नया सांस्कृतिक आयाम मिलेगा।
प्रसार भारती और दिल्ली सरकार की साझेदारी
इस योजना की खास बात इसका व्यापक और आधुनिक दृष्टिकोण है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के मंच से इसकी घोषणा और उसी दौरान समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर यह दर्शाते हैं कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर है। प्रसार भारती और दिल्ली सरकार की साझेदारी इसे और मजबूत आधार देती है।
फिल्म सिटी के लिए जमीन केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे दिल्ली सरकार को सौंपा जाएगा। हालांकि इसकी सटीक लोकेशन और विस्तृत लेआउट योजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR के जरिए तय की जाएगी।
प्रस्तावित फिल्म सिटी में आधुनिक और हाई-टेक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें शूटिंग के लिए अत्याधुनिक स्टूडियो, आउटडोर लोकेशन, पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट, एडिटिंग सूट, साउंड स्टूडियो और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन सेंटर शामिल होंगे। इसे इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि फिल्म, टीवी और OTT प्लेटफॉर्म के लिए हर प्रकार का कंटेंट यहां तैयार किया जा सके।
दिल्ली की पहचान को नया स्वरूप
फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती चरण यानी MoU स्टेज में है। इसके बाद जमीन आवंटन, DPR तैयार करना, फंडिंग और टेंडर प्रक्रिया जैसे कई अहम चरण पूरे होने बाकी हैं। निर्माण कार्य शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है, और पूरी परियोजना को साकार होने में कुछ साल लगने की संभावना है।
फिल्म सिटी का निर्माण केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि दिल्ली की पहचान को नया स्वरूप देने वाला कदम हो सकता है। यह राजधानी को एक मजबूत सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट दिल्ली को हैदराबाद जैसे बड़े फिल्म हब के बराबर खड़ा कर सकता है।
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