नोएडा के सेक्टर-38A में स्थित बोटैनिकल गार्डन(Botanical Garden) को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। शहर का यह प्रमुख हरित स्थल अब करीब दो साल तक आम लोगों के लिए बंद रहेगा। इसकी वजह है 490 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई एक बड़ी पुनर्विकास परियोजना, जिसके तहत इसे विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विकास कार्य के चलते गार्डन में आम जनता की एंट्री पूरी तरह रोक दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यहां बड़े स्तर पर निर्माण और संरचनात्मक बदलाव किए जाएंगे, इसलिए सुरक्षा और कार्य में बाधा से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह बंदी अस्थायी है, लेकिन अगले दो वर्षों तक गार्डन में प्रवेश संभव नहीं होगा।
बनेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का इको-टूरिज्म हब
इस परियोजना का मकसद गार्डन को सिर्फ घूमने-फिरने की जगह तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के इको-टूरिज्म और रिसर्च हब के रूप में विकसित करना है। इसके तहत गार्डन को कई थीम-आधारित हिस्सों में बांटा जाएगा, जिनमें ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल पौधों के सेक्शन, कैक्टस और सक्यूलेंट जोन, एक्वेटिक गार्डन, बोनसाई गार्डन, सेंसरी गार्डन, ट्रेलिस गार्डन और डिस्कवरी गार्डन शामिल होंगे।
ये नए जोन न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी एक समृद्ध लर्निंग स्पेस उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, यहां आधुनिक प्रशासनिक भवन, इंटरप्रिटेशन सेंटर और उन्नत रिसर्च सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे यह स्थान पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वनस्पति विज्ञान के अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र बन सके।
कब हुई थी इस गार्डन की स्थापना ?
इस बोटैनिकल गार्डन की स्थापना वर्ष 2002 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की गई थी। करीब 164 एकड़ में फैला यह गार्डन हजारों प्रजातियों के पेड़-पौधों का घर रहा है और नोएडा के प्रमुख आकर्षणों में गिना जाता है।
हालांकि फिलहाल इसके बंद होने से लोगों में थोड़ी निराशा जरूर है, लेकिन अधिकारियों का भरोसा है कि काम पूरा होने के बाद यह गार्डन पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक, खूबसूरत और सुविधाजनक रूप में सामने आएगा। आने वाले समय में यह जगह पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकती है।