केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। इन स्कैम्स में ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। 2024 में ऐसे 1.23 लाख मामले सामने आए, जिनमें करीब 1,935 करोड़ रुपये की ठगी हुई।
ठगों के डिवाइस ब्लॉक करने के आदेश
सरकार ने हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (IDC) की बैठक में वॉट्सऐप को निर्देश दिए हैं कि वह उन डिवाइस आईडी को ब्लॉक करे, जिनका इस्तेमाल स्कैम में हो रहा है। इससे ठग बार-बार नए अकाउंट नहीं बना पाएंगे।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स में ठग वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं कि वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हैं, और पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। स्क्रीन शेयरिंग और म्यूल अकाउंट्स के जरिए पैसा कई बैंकों और राज्यों में ट्रांसफर हो जाता है, जिससे ट्रेस करना मुश्किल होता है।
हाई-लेवल कमिटी की बैठक
यूनियन होम मिनिस्ट्री द्वारा दिसंबर 2025 में गठित IDC की तीसरी बैठक तीन घंटे चली। वॉट्सऐप ने अपनी डिटेक्शन सिस्टम और सेफगार्ड्स की जानकारी दी। कमिटी ने सुझाव दिए, जिन पर वॉट्सऐप ने अमल करने का वादा किया।
मुख्य सुझाव:
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डिजिटल अरेस्ट मामलों में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस आईडी को पहचानकर ब्लॉक करना।
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कॉलर की जानकारी, संदिग्ध अकाउंट पर वार्निंग और स्कैम नेटवर्क की बेहतर डिटेक्शन लाना।
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गलत APK और कंटेंट को रोकने के टेक्निकल मैकेनिज्म तैयार करना।
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डिलीट हुए अकाउंट्स का डेटा कम से कम 180 दिनों तक रखना।
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AI/ML सिस्टम का विस्तार कर इम्पर्सोनेशन और AI-जनरेटेड कंटेंट पहचानना।
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SIM बाइंडिंग लागू करना, ताकि अनाम या मल्टी-डिवाइस यूज बंद हो।
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फ्रॉड नेटवर्क और गवर्नमेंट सिंबल्स के दुरुपयोग पर समय पर रिस्पॉन्स देना।

