सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानों पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर केंद्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा है कि इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। यह निर्देश जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया।
गंगा संरक्षण से जुड़े कदमों की मांगी जानकारी
पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह गंगा के पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित अधिसूचना को लागू करने के लिए अब तक उठाए गए सभी कदमों को रिकॉर्ड पर रखे। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि गंगा नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानों को सभी प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्राधिकरण क्या योजना बना रहा है।
राज्यों को भी जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा बेसिन से जुड़े कई राज्यों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि गंगा नदी से जुड़े इस मुद्दे पर अलग-अलग मामलों के बजाय व्यापक जांच की जरूरत है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
अतिक्रमण को लेकर जताई गई चिंता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि गंगा नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण हो रहा है, जिस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि नदी के कुछ हिस्सों में मीठे पानी की डॉल्फिन बड़ी संख्या में पाई जाती हैं, जिनके संरक्षण के लिए नदी तटों का सुरक्षित रहना जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
शीर्ष अदालत पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस याचिका में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 30 जून 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें एनजीटी ने बाढ़ के मैदानों पर अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में गंगा नदी के संरक्षण और अवैध निर्माण पर समीक्षा कर रहा है।
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