देश की राजधानी(Delhi) से गुजरने वाले वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली से सिर्फ गुजरने वाले वाहनों पर लगने वाले ग्रीन टैक्स को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। नए फैसले के बाद अब ट्रकों को पहले के मुकाबले ज्यादा शुल्क देना होगा। अभी तक जो ट्रक करीब 2600 रुपये देते थे, उन्हें अब लगभग 4000 रुपये तक का भुगतान करना पड़ सकता है। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद यह टैक्स मुख्य रूप से उन वाहनों से लिया जाएगा जो दिल्ली में माल उतारने या किसी काम के लिए नहीं आते, बल्कि सिर्फ शहर को पार करने के लिए यहां की सड़कों का इस्तेमाल करते हैं। यानी जो ट्रक या अन्य भारी वाहन दिल्ली को सिर्फ रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करेंगे, उन्हें अब ज्यादा चार्ज देना होगा। दरअसल, ग्रीन टैक्स बढ़ाने के पीछे सरकार और अदालत का मकसद राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को नियंत्रित करना है। हालांकि इस फैसले से प्रदूषण और जाम में कितनी कमी आएगी, यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा। लेकिन इतना तय है कि इस फैसले के बाद कमर्शियल वाहनों की ऑपरेटिंग लागत जरूर बढ़ेगी।
किस वाहन को कितना देना होगा?
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। नए प्रावधानों के मुताबिक LMV(कार, वैन जैसे हल्के वाहन) को लगभग 2000 रुपये तक का शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं ट्रक और अन्य भारी कमर्शियल वाहनों पर यह चार्ज बढ़कर करीब 4000 रुपये तक हो जाएगा।
आखिर क्यों बढ़ाया गया यह चार्ज?
ग्रीन टैक्स बढ़ाने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में वाहन दिल्ली को शॉर्टकट रूट की तरह इस्तेमाल करते हैं, जिससे शहर में ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों बढ़ जाते हैं। इसलिए अब ऐसे वाहनों को दिल्ली से बाहर बने एक्सप्रेसवे और बाईपास का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
चार्ज ज्यादा होने से उम्मीद है कि ट्रांसपोर्टर और ड्राइवर दिल्ली में घुसने के बजाय बाहरी एक्सप्रेसवे का रास्ता चुनेंगे। इससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कुछ हद तक कमी आने की संभावना है।