भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और अहम उपलब्धि हासिल हुई है। DRDO ने मिशन से जुड़े ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण किया है, जिससे क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की जा सके।
इससे पहले भी 18 और 19 दिसंबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी में रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड सुविधा के जरिए ड्रोग पैराशूट का क्वालिफिकेशन टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। अब 18 फरवरी 2026 को उसी श्रृंखला में एक और मानक परीक्षण सफल रहा।
कई एजेंसियों की संयुक्त कोशिश
हालिया परीक्षण विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), ISRO, एडीआरडीई (ADRDE), DRDO और TBRL की संयुक्त टीमों ने मिलकर किया। यह टेस्ट भी रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड सुविधा पर आयोजित किया गया, जहां पैराशूट सिस्टम को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परखा गया।
ड्रोग पैराशूट का मुख्य कार्य क्रू मॉड्यूल की गति को नियंत्रित और कम करना है, ताकि दोबारा प्रवेश के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग हो सके। परीक्षण के दौरान प्रणाली ने बेहतर प्रदर्शन किया और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी विश्वसनीयता साबित की।
मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में अहम कदम
गगनयान मिशन भारत के लिए ऐतिहासिक परियोजना है, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्वदेशी तकनीक के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे। ड्रोग पैराशूट जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम की सफल टेस्टिंग इस मिशन की सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।