तरनतारन में 1993 में हुए फेक एनकाउंटर में आज कोर्ट का फैसला आया है, लगभग 32 सालों बाद कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए तत्कालीन SSP-DSP समेत पांच पुलिस अफसरों को दोषी करार दिया है। यह मामला लगभग 32-33 साल पुराना है, जिसमें पुलिस ने 7 नौजवानों को दो अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में मरा हुआ दिखाया गया था।
इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच करते हुए 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला चलाया, जिनमें से 5 दोषी पाए गए, जबकि कुछ को सबूत ना होने के कारण बरी कर दिया गया और कुछ की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई।
दोषी करार दिए गए अधिकारियों में रिटायर्ड एसएसपी भूपेंद्रजीत सिंह, रिटायर्ड इंस्पेक्टर सूबा सिंह, रिटायर्ड डीएसपी दविंदर सिंह, और रिटायर्ड इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह और गुलबर्ग सिंह शामिल हैं। इन सभी पर IPC की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत सजा सुनाई जाएगी। दोषी ठहराए जाने के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है और इस मामले में अब सोमवार को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।

