Thursday, March 5, 2026
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आखिर क्यों PM मोदी जाएंगे पाकिस्तान? जानिए वजह

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इस साल एससीओ की बैठक पाकिस्तान में होनी है। यह बैठक 15-16 अक्टूबर को इस्लामाबाद में होगी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसके लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, पीएम मोदी के वहां जाने की संभावना कम ही है। ऐसे में क्या पीएम नरेंद्र मोदी की जगह विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर वहां जाएंगे या कोई और हिस्सा लेगा?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है। वैसे, 3-4 जुलाई को कजाकिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन हुआ था, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी ने हिस्सा नहीं लिया था। उनकी जगह तत्कालीन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां हिस्सा लिया था, जबकि नरेंद्र मोदी आखिरी बार 2015 में पाकिस्तान गए थे।

भारत सरकार ने अब तक नहीं लिया निमंत्रण पर कोई फैसला

भारत सरकार ने अभी तक एससीओ प्रोटोकॉल के अनुसार सीएचजी बैठक के लिए दिए गए निमंत्रण पर कोई फैसला नहीं किया है। जम्मू में हुए हालिया आतंकी हमले पाकिस्तान के किसी भी उच्च स्तरीय मंत्री के दौरे के खिलाफ काम करेंगे। दरअसल, पिछले महीने अपने कारगिल विजय दिवस संदेश में पीएम मोदी ने पाकिस्तान का नाम लेते हुए कहा था कि उसने इतिहास से कुछ नहीं सीखा है और आतंकवाद और छद्म युद्ध के जरिए जुड़े रहने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान ने PM मोदी को SCO मीटिंग के लिए भेजा बुलावा

दरअसल, पाकिस्तान ने शंघाई सहयोग संगठन के शासनाध्यक्ष परिषद शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी को इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। भारत के अलावा संगठन के अन्य सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों को भी आमंत्रित किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक के लिए पीएम मोदी के इस्लामाबाद जाने की उम्मीद कम ही है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है SCO?
एससीओ मध्य एशिया के सभी देशों के बीच शांति और सहयोग बनाए रखने के लिए बनाया गया संगठन है। पाकिस्तान, चीन और रूस भी इसके सदस्य हैं। ऐसे में एससीओ भारत को आतंकवाद से लड़ने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखने के लिए एक मजबूत मंच मुहैया कराता है। वहीं, दुनिया के करीब 45 फीसदी कच्चे तेल और गैस के भंडार मध्य एशिया में मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसलिए ये देश आने वाले सालों में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
ऐसे में भारत सरकार की नजरें एससीओ सम्मेलन के दौरान इन सेंट्रल एशियाई देशों के साथ अपने संबंध और मजबूत करने पर रहेंगी।