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आमतौर पर जब दुनिया में जब युद्ध होता है, तो सोना-चांदी के दाम काफी तेजी से ऊपर जाते हैं, लेकिन इस बार अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के समय सोना लगभग 5,416 डॉलर प्रति औंस के आसपास था, जो 9 मार्च तक गिरकर करीब 5,095 डॉलर प्रति औंस रह गया। भारत में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। MCX पर सोना करीब 1.67 लाख रुपये से गिरकर लगभग 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया। वहीं चांदी 2 लाख 60 हजार रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
मजबूत डॉलर बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे वैश्विक बाजार में डॉलर की मांग बढ़ गई। डॉलर मजबूत होने पर सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है।
मुनाफावसूली का असर
पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी पहले ही काफी तेजी दिखा चुके थे। ऐसे में युद्ध की खबर आने के बाद कीमतें बढ़ीं तो कई निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया। इससे बाजार में बिकवाली बढ़ी और कीमतों में गिरावट आ गई।
निवेशकों के पास बढ़े सुरक्षित विकल्प
पहले संकट के समय निवेशक सीधे सोने की ओर जाते थे, लेकिन अब उनके पास कई सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड, डॉलर आधारित एसेट्स और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश भी सुरक्षित माना जा रहा है। इससे निवेशकों का पैसा अलग-अलग जगह बंट रहा है और सोने में तेज खरीदारी नहीं हो पा रही।
शेयर बाजार की गिरावट का असर
हाल के दिनों में शेयर बाजार में गिरावट भी देखने को मिली है। ऐसे में कई निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना बेच रहे हैं ताकि दूसरे निवेशों में हुए नुकसान की भरपाई कर सकें। इससे भी सोने की कीमतों पर दबाव बना है।
ऊंची ब्याज दरों का प्रभाव
वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं तो बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले निवेश विकल्प ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं, जबकि सोना कोई ब्याज नहीं देता। इस वजह से भी सोने की मांग सीमित हो रही है।
















