मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। इस जलमार्ग को खोलने के लिए अमेरिका ने कई सहयोगी देशों से मदद मांगी थी, लेकिन जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन समेत कई देशों ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है।
‘हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश हैं’
सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद ट्रंप ने मंगलवार को साफ कहा कि अमेरिका अपने दम पर भी होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने कहा कि “हमें किसी की जरूरत नहीं है। हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं और हमारे पास सबसे मजबूत सेना है।” ट्रंप का यह बयान उस समय आया जब कई सहयोगी देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत भेजने के अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
सहयोगी देशों को दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि सामूहिक रक्षा की बात करने के बावजूद कई देश अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की प्रतिक्रिया नाटो के भविष्य के लिए अच्छी नहीं होगी। गौरतलब है कि ट्रंप ने हाल ही में 7 देशों से होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोत तैनात करने का अनुरोध किया था, ताकि वहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
तीन देशों ने किया इनकार
ट्रंप की अपील को जर्मनी, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों ने अस्वीकार कर दिया। इन देशों ने साफ कहा कि फिलहाल उनके पास होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत भेजने की कोई तत्काल योजना नहीं है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका या इजराइल ने जर्मनी से चर्चा नहीं की थी और इस मिशन को लेकर संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ या नाटो की मंजूरी भी नहीं मिली है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ा तेल संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को घेर रखा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 20–30% तेल का कारोबार इसी मार्ग से होता है, इसलिए इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।