भारतीय चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत बड़ा कदम उठाते हुए देश के 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की मतदाता सूची से करीब 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए की गई है।
क्यों हटाए गए नाम?
आयोग के अनुसार, हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं। इस अभियान के दौरान करीब 51 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया गया। उद्देश्य था कि फर्जी मतदान की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
कहां से हुई शुरुआत?
SIR अभियान की शुरुआत बिहार से हुई थी, जिसके बाद इसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु समेत 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश तक विस्तार दिया गया।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा नाम कटे?
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अंडमान-निकोबार में सबसे ज्यादा 16.6% नाम हटाए गए
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उत्तर प्रदेश में 13.2%
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गुजरात में 13.1%
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छत्तीसगढ़ में 11.3%
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पश्चिम बंगाल में 10.9% (27 लाख से ज्यादा नाम हटे)
इन राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता पाए गए जो या तो स्थान बदल चुके थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
नए वोटर भी जुड़े
नाम हटाने के साथ-साथ आयोग ने 2 करोड़ नए मतदाता भी जोड़े हैं।
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उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 92.4 लाख नए वोटर जुड़े
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तमिलनाडु में 35 लाख
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केरल में 20.4 लाख
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राजस्थान में 15.4 लाख
अब कितने हैं कुल मतदाता?
इस शुद्धिकरण के बाद इन राज्यों में कुल 45.8 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकेंगे।
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