उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। सत्र के पहले दिन की कार्यवाही राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के साथ आरंभ हुई। इसके पश्चात विधानसभा में वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। पहले दिन की कार्यवाही के बाद सदन को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन के पटल पर रखी। इस दौरान उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी अब राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़कर 9 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा करीब 8 प्रतिशत के आसपास था।
मुख्यमंत्री ने रखा सरकार का एजेंडा
बजट सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से संवाद कर सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान विकास, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सदन में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग की अपील भी की। सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही पूरी तैयारी के साथ नजर आए।
36 लाख करोड़ रुपये अर्थव्यवस्था पहुंचने की उम्मीद
जानकारी के मुताबिक, आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करते हुए सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य का योगदान 2016-17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 9.1 प्रतिशत हो गया है।
विधानसभा में पहली बार पेश हुआ आर्थिक सर्वे वित्त मंत्री ने इस पहल को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर आर्थिक सर्वेक्षण को विधानसभा में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह सर्वे केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रदेश की विकास यात्रा, जन आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाने वाला दस्तावेज है।
निवेश के लिहाज से बदली यूपी की तस्वीर
खन्ना ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश अब कृषि, उद्योग और तकनीकी नवाचार का बड़ा केंद्र बन चुका है। उन्होंने इशारों-इशारों में पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले जहां निवेशक राज्य में आने से हिचकते थे, वहीं अब प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सत्ता संभाली थी और 2022 में फिर से पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई।
प्रति व्यक्ति आय में हुई वृद्धि
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 54,564 रुपये थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 1,09,844 रुपये तक पहुंच गई है। सरकार का अनुमान है कि 2025-26 में यह आंकड़ा 1.20 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक हो सकता है। इसके साथ ही, जीएसडीपी के आधार पर प्रति व्यक्ति आय 61,142 रुपये से बढ़कर 1,26,304 रुपये हो गई है।
तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास
सर्वेक्षण में बताया गया कि वर्ष 2024-25 में राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान 25.8 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र का 27.2 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र का योगदान 47 प्रतिशत रहा। वित्त मंत्री ने कहा कि इन तीनों क्षेत्रों में संतुलित प्रगति ने प्रदेश की आर्थिक नींव को और मजबूत किया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट का बड़ा योगदान
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के दौरान सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को 46,728.48 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस बजट से अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती मिलेगी।

