ईरान के साथ युद्ध के बढ़ते तनाव ने अमेरिका और ब्रिटेन के बीच संबंधों में खटास पैदा कर दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मतभेदों के बाद ब्रिटेन ने अमेरिका का साथ देने से इनकार किया, जिससे ब्रिटिश बैंक और आर्थिक संस्थान डर के साये में आ गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीति और आर्थिक हथियार ब्रिटेन की कैशलेस अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
ब्रिटेन पर अमेरिकी नियंत्रण
ब्रिटेन की कैशलेस इकोनॉमी का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा दो अमेरिकी कंपनियों Visa और मास्टरकार्ड के नियंत्रण में है। ये दोनों कंपनियां ब्रिटेन के कार्ड ट्रांजैक्शन नेटवर्क पर हावी हैं। वैश्विक स्तर पर भी वीजा और मास्टरकार्ड पेमेंट नेटवर्क के लगभग 90 प्रतिशत लेनदेन को नियंत्रित करते हैं। रोजाना वीजा से 639 मिलियन से 900 मिलियन ट्रांजैक्शन होते हैं, जबकि मास्टरकार्ड करीब 400 मिलियन ट्रांजैक्शन संभालता है।
किल स्विच से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था खतरे में
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रंप किसी भी परिस्थिति में ब्रिटेन पर ‘किल स्विच’ इस्तेमाल करता है, यानी वीजा और मास्टरकार्ड के नेटवर्क को अचानक बंद कर देता है, तो ब्रिटेन की पूरी कैशलेस अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी। इस स्थिति में लोगों को वेतन नहीं मिलेगा, ATM से नकदी नहीं निकाली जा सकेगी और पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल व डिजिटल लेनदेन सब प्रभावित होंगे। ब्रिटेन की लगभग 100 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने की संभावना है।
ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक डर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खतरा केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। ट्रंप की रणनीति और अमेरिका की वैश्विक आर्थिक पकड़ दुनिया के कई देशों पर असर डाल सकती है। हाल ही में ईरान, क्यूबा और वेनेजुएला के उदाहरणों से स्पष्ट है कि ट्रंप अपने विरोधियों के खिलाफ आर्थिक दबाव और पाबंदियों का इस्तेमाल कर सकता है।
ब्रिटेन की तैयारी और चिंताएं
ब्रिटेन के बैंकर्स और आर्थिक संस्थान अब अमेरिका के संभावित दबाव और किल स्विच की स्थिति के लिए सतर्क हो गए हैं। वित्तीय विशेषज्ञ ब्रिटेन को वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क और आपातकालीन आर्थिक योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि किसी भी आर्थिक संकट से बचा जा सके।
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