Wednesday, February 11, 2026
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UP News : वाराणसी में ओरल कैंसर को लेकर प्रशासन की सख्ताई, वरिष्ठ चिकित्सकों संग बनाया एक्शन प्लान

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक बेहद गंभीर और चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में वाराणसी जिले में ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) के मामलों में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है, जिससे यह जनपद पूरे प्रदेश में शीर्ष पर पहुंच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और बीमारी की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में वाराणसी में ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। एक ही जिले में इतने बड़े पैमाने पर मामलों का सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। चिकित्सकों का मानना है कि तंबाकू, गुटखा और पान मसाला का अत्यधिक सेवन इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है, और वाराणसी में इन उत्पादों की व्यापक उपलब्धता इसकी मुख्य वजह बन रही है।

अनुभवी डॉक्टरों के साथ जिला प्रशासन की अहम बैठक

इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों, अनुभवी डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में ओरल कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और जन जागरूकता को लेकर व्यापक एक्शन प्लान तैयार करने पर सहमति बनी। प्रशासन ने तीन स्तरों पर इस बीमारी से निपटने की रणनीति बनाई है।

किन तरीकों से मरीजों को मिलेगी मदद ?

इस योजना के तहत सबसे पहले शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से स्क्रीनिंग की सुविधा दी जाएगी। लोग अपने मुंह की तस्वीर अपलोड कर सकेंगे, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से शुरुआती स्तर पर जांचा जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे, जहां संदिग्ध मरीजों की जांच कर उन्हें नजदीकी हेल्थ सेंटर या आवश्यकता पड़ने पर वाराणसी स्थित कैंसर अस्पतालों में रेफर किया जाएगा।

तीसरा और सबसे अहम कदम नशे की रोकथाम से जुड़ा है। प्रशासन ने स्कूलों और कॉलेजों के आसपास गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही बच्चों और युवाओं को खास तौर पर इन नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाएगा, ताकि कम उम्र में इस घातक बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सके।

वरदान साबित हुए अस्पताल

इलाज के मोर्चे पर भी वाराणसी देशभर में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर अस्पताल और भाभा कैंसर अस्पताल यहां के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या प्रतिशत के लिहाज से मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल से भी अधिक बताई जा रही है, जो वाराणसी की कैंसर उपचार क्षमता को दर्शाता है।

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