Tuesday, February 10, 2026
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UP News : 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में सियासी हलचल तेज, सपा सांसद के भतीजे ने की CM योगी से मुलाकात

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को बस्ती से समाजवादी पार्टी के सांसद और कुर्मी समाज के बड़े चेहरे राम प्रसाद चौधरी के भतीजे अरविंद चौधरी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की।

राम प्रसाद चौधरी के भतीजे ने की CM योगी से मुलाकात

हाल ही में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद इस मुलाकात को बेहद अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कुर्मी समाज के एक बड़े हिस्से का समर्थन नहीं मिल पाया था, जिसे पार्टी की हार की प्रमुख वजहों में गिना गया। वहीं, समाजवादी पार्टी पूर्वांचल में मजबूत स्थिति में रही है। ऐसे में अरविंद चौधरी जैसे प्रभावशाली कुर्मी नेता की सक्रियता ने भाजपा के लिए नए राजनीतिक अवसर खोल दिए हैं।

पूर्वांचल में बढ़ी सियासी सरगर्मी

अरविंद चौधरी और सीएम योगी की मुलाकात के बाद बस्ती मंडल ही नहीं, बल्कि अयोध्या, देवीपाटन और गोरखपुर मंडलों में भी कुर्मी समाज के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सांसद राम प्रसाद चौधरी की क्षेत्र में मजबूत पकड़ रही है। उनकी राजनीतिक ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि उन्होंने अपने बेटे कवींद्र चौधरी को कप्तानगंज विधानसभा सीट से विधायक बनवाया, वहीं पहले अपने भतीजे अरविंद चौधरी को बसपा से लोकसभा तक पहुंचाया था।

अरविंद चौधरी की सियासी पृष्ठभूमि

अरविंद चौधरी 2009 से 2014 तक बसपा के टिकट पर बस्ती से सांसद रह चुके हैं। लंबे समय से वे सक्रिय राजनीति में बने हुए हैं, लेकिन हाल के वर्षों में उनकी भूमिका सीमित होती दिखी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पारिवारिक प्राथमिकताओं के चलते उन्हें पीछे कर दिया गया, जिससे कुर्मी समाज के भीतर भी असंतोष की सुगबुगाहट थी।

सपा के लिए खतरे की घंटी?

राम प्रसाद चौधरी पांच बार विधायक रह चुके हैं और 2022 में बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। उसी चुनाव में उन्होंने कप्तानगंज सीट से अपने बेटे को विधायक बनवाया। गौर करने वाली बात यह है कि योगी लहर के बावजूद 2022 में बस्ती जिले की पांच में से चार विधानसभा सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अरविंद चौधरी की यह नई सक्रियता सपा की मजबूत पकड़ में दरार का संकेत मानी जा रही है।

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