अलीगढ़ साइबर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है, उन्होंने छह अलग-अलग राज्यों से 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये संदिग्ध पूरे देश में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट चला रहे थे। इस गैंग के कई सदस्य विदेश में भी रहते हैं। निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच देकर धोखाधड़ी की जा रही थी।
इस मामले में SP (ग्रामीण) अमृत जैन ने बताया कि टेलीकम्युनिकेशन मंत्रालय के साथ समन्वय में काम करते हुए अलीगढ़ साइबर क्राइम सेल ने करीब 600 ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप्स की पहचान की, जिनका इस्तेमाल देशभर के लोगों को निवेश के नाम पर फंसाने और ठगने के लिए किया जा रहा था।पुलिस का दावा है कि समय रहते की गई कार्रवाई से लगभग 500 करोड़ रुपये के अनुमानित साइबर फ्रॉड को रोका जा सका। अगर यह रैकेट सक्रिय रहता, तो देशभर में करीब 1.5 लाख से अधिक लोग इसके शिकार हो सकते थे।
रिटायर्ड बैंक अधिकारी की शिकायत से हुआ खुलासा
अलीगढ़ के SP ने बताया कि यह पूरा मामला तब सामने आया, जब पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त डिप्टी जनरल मैनेजर दिनेश शर्मा ने 31 जनवरी को साइबर क्राइम सेल से संपर्क किया। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें व्हाट्सऐप आधारित निवेश योजना के जरिए ठगी का शिकार बनाया गया है।
दिनेश शर्मा ने पुलिस को बताया कि उन्हें हर सप्ताह 40 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया गया था। शुरुआत में संदेह होने के बावजूद उन्होंने 16 दिसंबर को ट्रायल के तौर पर 5,000 रुपये निवेश किए, जिसका उन्हें रिटर्न भी मिला। इससे उनका भरोसा बढ़ गया और ठगों ने उन्हें धीरे-धीरे बड़ी रकम लगाने के लिए उकसाया।
1 करोड़ निवेश का मिला था ऑफर
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने शर्मा को 1 करोड़ रुपये तक निवेश करने का मौका भी दिया। जब उन्होंने फंड की कमी का हवाला देकर मना कर दिया, तो ठगों ने उनसे पहले से जमा कराए गए 11 लाख रुपये हड़प लिए।
6 राज्यों से 12 आरोपी गिरफ्तार
यूपी की अलीगढ़ साइबर सेल पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह राज्यों-ओडिशा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश-से 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए पूरे देश में साइबर इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का जाल फैला रहा था, जिसके विदेशी कनेक्शन भी सामने आए हैं।
SP अमृत जैन ने बताया कि शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम सेल दिनेश शर्मा के लिए 5.64 लाख रुपये की रकम रिकवर करने में सफल रही। जांच के दौरान पुलिस ने देशभर में 500 से अधिक व्हाट्सऐप ग्रुप सदस्यों से संपर्क कर उन्हें इस संदिग्ध फ्रॉड के बारे में आगाह किया, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान होने से बचाया जा सका।
विदेशी मास्टरमाइंड की तलाश तेज
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर क्राइम सेल अब इस रैकेट को संचालित करने वाले विदेश में बैठे मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इसके लिए CBI और इंटरपोल की मदद भी ली जा रही है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
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