सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी, जिसमें सहारा शहर की लीज रद्द किए जाने को चुनौती दी गई थी। इस फैसले के साथ ही राज्य की नई विधानसभा के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
पहले हाई कोर्ट, अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका
इससे पहले हाई कोर्ट भी सहारा की याचिका खारिज कर चुका था। योगी सरकार ने 1994 में दी गई लीज की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सहारा शहर की लीज रद्द कर दी थी और प्रशासनिक कब्जा लेकर नगर निगम को सौंप दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस कार्रवाई को वैध ठहरा दिया है।
नई विधानसभा निर्माण को मिली रफ्तार
सरकार अब सहारा शहर में नई विधानसभा भवन के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने जा रही है। इसके लिए बजट पहले ही आवंटित किया जा चुका है और अब कंसल्टेंट नियुक्ति व विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर काम शुरू किया जा रहा है।
पर्याप्त जमीन और बेहतर लोकेशन
नई विधानसभा के लिए सरकार लंबे समय से करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश में थी। सहारा शहर में यह जरूरत पूरी होती दिख रही है, जहां लखनऊ नगर निगम की लगभग 170 एकड़ और एलडीए की करीब 75 एकड़ जमीन मिलाकर कुल 245 एकड़ क्षेत्र उपलब्ध है।
लोकेशन और कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह क्षेत्र उपयुक्त माना जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में सुविधा और पहुंच बेहतर होगी।
आगे की योजना
उच्च स्तर पर इस परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और अब सरकार तेजी से आगे की प्रक्रिया पर काम कर रही है। नई विधानसभा भवन के निर्माण से प्रदेश की प्रशासनिक संरचना को आधुनिक स्वरूप मिलने की उम्मीद है।
यह फैसला न केवल कानूनी रूप से अहम है, बल्कि उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।