Wednesday, February 18, 2026
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उत्तराखंड में UCC जल्द होगा लागू: जानें शादी, और लिव-इन रिलेशनशिप में क्या बदलेगा ?

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 20 जनवरी 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी नियमावली को मंजूरी दे दी गई। इस ऐतिहासिक कदम से विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, वसीयत, और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होगा।

UCC की विशेषताएं और प्रावधान

समान नागरिक संहिता के तहत सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम और अधिकार होंगे। यह न केवल सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है बल्कि प्रदेश की न्याय व्यवस्था को सरल और समावेशी बनाने की ओर एक ठोस प्रयास है।

मुख्य प्रावधान

  1. विवाह और तलाक:

    • विवाह पंजीकरण और तलाक की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा।
    • विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष निर्धारित।
    • महिलाओं को तलाक के मामलों में पुरुषों के समान अधिकार दिए जाएंगे।
    • हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध।
  2. लिव-इन रिलेशनशिप:

    • लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य।
    • लिव-इन युगलों को पंजीकरण रसीद के आधार पर घर, हॉस्टल, और पीजी में रहने की अनुमति।
    • लिव-इन में जन्मे बच्चों को जैविक संतान का दर्जा और समान अधिकार।
  3. उत्तराधिकार और वसीयत:

    • बेटा और बेटी को समान उत्तराधिकार।
    • वसीयत के पंजीकरण, संशोधन, और रद्दीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन।
  4. तकनीकी सुधार:

    • अत्याधुनिक ऑनलाइन पोर्टल का विकास।
    • आधार आधारित सत्यापन और 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा।
    • 13 से अधिक विभागों के डाटा समन्वय की सुविधा।

सरकार की तैयारी और मॉक ड्रिल

यूसीसी को सुचारु रूप से लागू करने के लिए सरकार ने व्यापक तैयारी की है। 21 जनवरी 2025 को प्रदेशभर में पहली बार यूसीसी के लिए विकसित वेब पोर्टल का उपयोग करके मॉक ड्रिल की गई। इसमें रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार, और अन्य अधिकारी पोर्टल पर लॉगइन कर विवाह, तलाक, और अन्य सेवाओं का अभ्यास करेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यूसीसी लागू होने के बाद जनता को किसी भी तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े।

सीएम धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी। यह हमारी सरकार का जनता से किया गया वादा था, जिसे हम निभा रहे हैं।” उन्होंने बताया कि यूसीसी के क्रियान्वयन में तकनीकी दक्षता का विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे जनता को सेवाएं आसानी से उपलब्ध हों।

यूसीसी लागू होने के लाभ

  • सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिलेंगे।
  • सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
  • प्रशासनिक प्रक्रियाएं पारदर्शी और सरल बनेंगी।
  • डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से सेवाएं तेज और सुलभ होंगी।

क्या कहते हैं जानकार?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तराखंड को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श बनाने की दिशा में अहम साबित होगा। सामाजिक और कानूनी रूप से यह एक बड़ी पहल है, जिससे समाज में समानता और एकता का संदेश जाएगा।

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