हरियाणा विधानसभा के मौजूदा सत्र में कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने विधानसभा की बैठक की सीटिंग बढ़ाने का एक अहम सुझाव दिया। अशोक अरोड़ा ने प्रस्ताव रखा कि हर साल विधानसभा की सीटिंग कम से कम 40 दिन होनी चाहिए, और इस सुझाव को विधानसभा के नियमों में भी शामिल किया जाना चाहिए।
हिमाचल विधानसभा का दिया उदाहरण
अरोड़ा ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि वहाँ इस तरह का नियम लागू है, जहां हर साल विधानसभा के कम से कम 40 सत्र होते हैं। उनका मानना है कि इससे विधानसभा में चर्चा के अवसर बढ़ेंगे, जिससे जनहित से जुड़े मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
विधानसभा अध्यक्ष का सकारात्मक रुख
विधानसभा अध्यक्ष ने अरोड़ा के सुझाव की सराहना करते हुए कहा कि यह एक अच्छा विचार है और इसे नियमों में शामिल किया जाना चाहिए ताकि सीटिंग को बढ़ाया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में नियम तो बने हैं, लेकिन वहाँ भी सालाना औसतन केवल 18-20 सीटिंग ही हो पाती हैं। इसके बावजूद, स्पीकर ने आश्वासन दिया कि हरियाणा में भी सीटिंग बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
पहले भी हुई है प्रयास
अध्यक्ष ने बताया कि हरियाणा विधानसभा में पहले भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और सीटिंग बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। हालांकि विभिन्न व्यस्तताओं के कारण इन प्रयासों को साकार रूप में अमल में लाने में चुनौतियाँ आती हैं, फिर भी इस पर विचार-विमर्श जारी रहेगा।
जनता को क्या होगा लाभ ?
विधानसभा की सीटिंग बढ़ाने के इस सुझाव का जनता को सीधा लाभ हो सकता है। विधायकों को अधिक समय मिलेगा कि वे जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा कर सकें। इससे जनता की समस्याओं पर गहनता से विचार किया जा सकेगा, और सरकार से उन पर शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है।















