Bab el-Mandeb Strait Threat: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने संकेत दिया है कि देश अपनी रणनीति को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आगे बढ़ाकर बाब अल-मंदेब तक विस्तारित कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
बाब अल-मंदेब को लेकर बढ़ी हलचल
गलिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वैश्विक तेल, एलएनजी, गेहूं, चावल और उर्वरक का कितना हिस्सा बाब अल-मंदेब से होकर गुजरता है। उनके इन सवालों को विशेषज्ञ संभावित रणनीतिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं, जो दुनिया भर के देशों और कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
What share of global oil, LNG, wheat, rice, and fertilizer shipments transits the Bab-el-Mandeb Strait?
Which countries and companies account for the highest transit volumes through the strait? 🤔
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 3, 2026
होर्मुज के बाद दूसरा बड़ा ‘चोकपॉइंट’
ईरान पहले ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर सख्ती दिखा चुका है। अब बाब अल-मंदेब को निशाना बनाने के संकेत से साफ है कि तेहरान वैश्विक समुद्री ‘चोकपॉइंट्स’ पर दबाव बनाकर अपने विरोधियों को घेरने की रणनीति अपना सकता है।
वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा है यह मार्ग
बाब अल-मन्देब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया के बीच व्यापार का अहम मार्ग है। इस रास्ते में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
तेल से लेकर खाद्य संकट तक का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर रुकावट आती है, तो ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसके अलावा गेहूं, चावल और उर्वरक जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट पैदा होने का खतरा बढ़ जाएगा।
दुनिया पर दबाव बनाने की रणनीति?
ईरान का यह रुख संकेत देता है कि वह वैश्विक व्यापारिक हितों को प्रभावित कर बड़े देशों पर दबाव बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मौजूदा हालात में यह कदम मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
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