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चुनावी खर्च पर तय हो सख्त सीमा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

चुनावी खर्च की सीमा तय करने और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। इस घटनाक्रम को चुनावी सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनावों में वास्तविक खर्च तय सीमा से कहीं अधिक होता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उम्मीदवारों के लिए तो खर्च की सीमा निर्धारित है, लेकिन राजनीतिक दलों के कुल खर्च और चुनावी प्रचार पर प्रभावी निगरानी का अभाव है। इससे चुनावी प्रक्रिया में असमानता पैदा होती है और धनबल का प्रभाव बढ़ता है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि चुनाव में बेहिसाब पैसा खर्च होता है तो यह समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने केंद्र सरकार और Election Commission of India से पूछा कि क्या मौजूदा नियम पर्याप्त हैं या उनमें सुधार की जरूरत है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च की रियल-टाइम निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा चुनाव प्रचार में डिजिटल और सोशल मीडिया पर होने वाले खर्च को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित कर सीमा के दायरे में लाने की बात कही गई है।

ज्ञात हो कि वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा तय है, जो राज्य और चुनाव के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। हालांकि, राजनीतिक दलों के खर्च को लेकर नियम अपेक्षाकृत व्यापक हैं और कई बार वास्तविक आंकड़ों पर सवाल उठते रहे हैं।

Supreme Courtकानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत इस मामले में विस्तृत दिशानिर्देश जारी करती है तो चुनावी पारदर्शिता में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे काले धन के इस्तेमाल पर अंकुश लग सकता है और छोटे दलों तथा स्वतंत्र उम्मीदवारों को अधिक निष्पक्ष अवसर मिल सकता है।

वहीं, केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से संभावित जवाब में यह कहा जा सकता है कि चुनावी खर्च की निगरानी के लिए पहले से ही तंत्र मौजूद है और समय-समय पर सुधार भी किए जाते रहे हैं। चुनाव आयोग ने पिछले वर्षों में कई कदम उठाए हैं, जैसे कि खर्च की ऑनलाइन रिपोर्टिंग, निगरानी टीमें और फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती।

अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां सरकार और चुनाव आयोग अपना पक्ष रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला यह तय कर सकता है कि देश में चुनावी खर्च की व्यवस्था में किस हद तक बदलाव होंगे। लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है।

Shivam Yadav
Shivam Yadav
मैं पत्रकार और डिजिटल मार्केटर हूँ, जिसे मीडिया, कंटेंट क्रिएशन और ऑनलाइन ब्रांड ग्रोथ का 10+ वर्षों का अनुभव है। अपनी Investigative Journalism विचारधारा, जानकारी और विश्लेषण आधारित कंटेंट लोगों तक पहुँचाता आया हूँ । ट्रेंड को समझकर उसे असरदार कंटेंट में बदलना और ऑडियंस से मजबूत कनेक्शन बनाना ही मेरी कोशिश है।
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