सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में तीन से चार वर्षीय बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि पुलिस खुद पीड़िता के पास जाने के बजाय उसे थाने बुला रही है। कोर्ट ने इसे संवेदनहीनता करार देते हुए सख्त टिप्पणी की।
मामले की जांच के लिए SIT का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया है। इसमें हरियाणा कैडर की महिला IPS अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि SIT को तुरंत नोटिफाई किया जाए और गुरुग्राम पुलिस सभी दस्तावेज जल्द से जल्द टीम को सौंपे।
POCSO केस को कमतर आंकने पर भी आपत्ति
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में अपराध को कमतर करने की कोशिश की। कोर्ट ने इस पर सख्त आपत्ति जताते हुए जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों और बाल कल्याण समिति को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। इसके अलावा बाल कल्याण समिति के सदस्यों को भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है कि उन्हें पद से क्यों न हटाया जाए।
महिला जज को सौंपी जाएगी सुनवाई
कोर्ट ने गुरुग्राम के जिला जज को निर्देश दिया है कि इस मामले की सुनवाई पोक्सो कोर्ट की वरिष्ठ महिला न्यायिक अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि पीड़िता को संवेदनशील माहौल मिल सके। इससे पहले 23 मार्च को भी सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को फटकार लगाई थी। अदालत ने डीजीपी, पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर सभी दस्तावेजों के साथ पेश होने का निर्देश दिया था।
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