Thursday, February 19, 2026
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आवारा कुत्तों को लेकर SC ने दिए तीन अहम आदेश… ‘सड़कों पर न दिखें, शेल्टर होम में रखे’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 नवंबर, 2025) को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर तीन आदेश जारी किए। कोर्ट ने राज्यों को न्यायमित्र की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। दूसरे आदेश में, कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवारा पशुओं के संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को पूरे देश में लागू किया जाए। आवारा पशुओं को राजमार्गों और सड़कों से हटाकर आश्रय स्थलों में रखा जाए। नगर निगम गश्ती दल बनाएँ और 24 घंटे निगरानी रखें। कोर्ट ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने का भी आदेश दिया।

तीसरे आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों को शैक्षणिक संस्थानों, खेल परिसरों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बाड़ लगाकर और अन्य उपाय अपनाकर प्रवेश करने से रोका जाए। टीकाकरण और नसबंदी के बाद उन्हें आश्रय स्थलों में रखा जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आदेश को आठ सप्ताह के भीतर लागू किया जाए।

11 अगस्त को, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कुत्तों के काटने की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के सभी आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में रखने का आदेश दिया। पशु प्रेमियों ने इसका विरोध किया और मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष लाया, जिसके बाद मामला तीन न्यायाधीशों की पीठ को सौंप दिया गया।

तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पिछले आदेश को पलटते हुए, दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी करने और उनका टीकाकरण करने तथा उन्हें उनके आवास में वापस छोड़ने का आदेश दिया। 22 अगस्त को, न्यायालय ने सुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया और राज्यों से हलफनामे दाखिल करने को कहा। हालाँकि, दो महीने के भीतर केवल दो राज्यों ने ही हलफनामे दाखिल किए।

न्यायाधीशों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि उनके नोटिस के जवाब में दो राज्यों को छोड़कर किसी ने भी हलफनामा दाखिल नहीं किया। यहाँ तक कि दिल्ली सरकार ने भी हलफनामा दाखिल नहीं किया। केवल एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) ने ही हलफनामा दाखिल किया है।

27 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश भर में कुत्तों से जुड़ी घटनाएँ लगातार हो रही हैं। इससे भारत की छवि वैश्विक स्तर पर धूमिल हो रही है। ऐसे में राज्य सरकारों का ढीला रवैया गलत है। राज्यों द्वारा जवाब दाखिल न करने पर नाराज़गी जताते हुए अदालत ने पूछा, “क्या राज्य के अधिकारी अखबार नहीं पढ़ते या सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते? भले ही आदेश की प्रति उनके पास न पहुँची हो, लेकिन उन्हें इस महत्वपूर्ण मामले की जानकारी ज़रूर रही होगी।”

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