बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इससे पहले 16 मार्च को वे संसद के उच्च सदन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, जबकि 30 मार्च को उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब शपथ लेने के साथ ही वे उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। इस सूची में पहले से लालू प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा और सुशील कुमार मोदी इसमें शामिल हैं।
छह महीने तक सीएम बने रह सकते हैं
राज्यसभा जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा देंगे। संविधान के प्रावधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना राज्य के किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है। ऐसे में बिहार की राजनीति में आगे क्या समीकरण बनते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
प्रशासनिक गतिविधियों में सक्रिय CM
राज्यसभा के लिए चुने जाने के बावजूद नीतीश कुमार(Nitish Kumar) अभी भी राज्य के प्रशासनिक कार्यों में पूरी तरह सक्रिय हैं। बुधवार को उन्होंने पटना स्थित वाल्मी (जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान) परिसर में बने बिपार्ड स्किल पार्क के दक्षता भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभिन्न कक्षाओं में पढ़ रहे छात्रों से संवाद किया और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए कौशल विकास बेहद जरूरी है, ताकि वे अच्छे रोजगार के अवसर हासिल कर सकें। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जाए।
छात्रावास सुविधाओं पर भी दिया जोर
मुख्यमंत्री ने हिमाद्री छात्रावास समेत अन्य हॉस्टलों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिसर को व्यवस्थित रखा जाए तथा छात्रों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार युवाओं के बेहतर भविष्य और रोजगार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।