नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि ये लोग म्यांमार के जातीय समूहों को हथियार और आतंकवादी उपकरण मुहैया कराने के साथ-साथ भारत में उग्रवादी गतिविधियों को समर्थन दे रहे थे।
13 मार्च को हुए थे गिरफ्तार
NIA ने 13 मार्च को इन आरोपियों को अलग-अलग शहरों से गिरफ्तार किया था। इनमें तीन यूक्रेनी नागरिक दिल्ली से, तीन लखनऊ से और एक अमेरिकी नागरिक कोलकाता से पकड़ा गया NIA के अनुसार आरोपियों के खिलाफ आतंकवादी षड्यंत्र (धारा 18) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी AK-47 राइफलों से लैस आतंकवादियों के संपर्क में थे और उनकी अवैध गतिविधियों में मदद कर रहे थे। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े हुए हैं और कुछ प्रतिबंधित भारतीय उग्रवादी संगठनों को हथियार, उपकरण और प्रशिक्षण देकर समर्थन कर रहे थे।
कोर्ट ने 11 दिन की रिमांड पर भेजा
मामले की सुनवाई करते हुए NIA के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सातों आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी ने अदालत से 15 दिन की रिमांड मांगी थी। NIA का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
यूक्रेन ने जताया विरोध
इस गिरफ्तारी को लेकर यूक्रेन सरकार ने भारत के सामने विरोध दर्ज कराया है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत में उनके राजदूत डॉ. ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर आधिकारिक विरोध नोट सौंपा। यूक्रेन ने अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की है।
दूतावास ने उठाए कई सवाल
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने उनके दूतावास को गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना नहीं दी, जो अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के खिलाफ है। साथ ही उनका दावा है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जिससे साबित हो कि गिरफ्तार नागरिक भारत या म्यांमार में अवैध गतिविधियों में शामिल थे।
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