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सिर्फ 3 घंटे में तय होगी पटना-पूर्णिया की दूरी, 32,000 करोड़ रुपये में बनेगा बिहार का पहला हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे

बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नया ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे (NE-9) के निर्माण को अब केंद्र सरकार की आर्थिक कार्य विभाग से वित्तीय मंजूरी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करते हुए पटना से पूर्णिया की दूरी महज तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी।

हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल में होगा निर्माण

इस मेगा प्रोजेक्ट को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत बनाया जाएगा। इसमें 40 प्रतिशत राशि सरकार और 60 प्रतिशत निर्माण एजेंसी द्वारा निवेश की जाएगी। प्रारंभिक रूप से यह चार लेन का होगा, लेकिन जमीन का अधिग्रहण छह लेन के हिसाब से किया गया है, ताकि भविष्य में यातायात बढ़ने पर आसानी से इसे चौड़ा किया जा सके।

लागत और मार्ग की विस्तृत जानकारी

इस एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत लगभग 32,000 करोड़ रुपये है। यह वैशाली के मीरनगर अरेजी (हाजीपुर) से शुरू होकर पूर्णिया के हंसदाह में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ेगा। 8 जिलों—वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया और पूर्णिया—को जोड़ने वाला यह मार्ग बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

कोसी नदी पर 7 किलोमीटर का पुल

एक्सप्रेस-वे के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में कोसी नदी पर बनने वाला 7 किलोमीटर लंबा छह लेन का पुल शामिल है, जो कुशेश्वरस्थान और सिमरी बख्तियारपुर को जोड़ेगा। इसके अलावा, तीन अलग-अलग पैकेजों में कुल 21 बड़े पुल और 11 रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा। समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा जिले के मुख्यालयों को एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए विशेष लिंक रोड बनाए जाएंगे।

आर्थिक विकास और व्यापार के नए अवसर

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे केवल सड़क नहीं, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था का ‘ग्रोथ इंजन’ होगा। इससे न केवल यात्रियों की यात्रा आसान होगी, बल्कि पश्चिम बंगाल और असम की ओर जाने वाले मालवाहक ट्रकों के लिए भी सुगम मार्ग मिलेगा। इसके अलावा, पटना रिंग रोड से जुड़ने के कारण शहर के अंदर ट्रैफिक दबाव कम होगा और सीमांचल क्षेत्र में व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

निर्माण काम जल्द शुरू 

केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलते ही एक्सप्रेस-वे के निर्माण का काम तेज गति से शुरू होने की उम्मीद है। बिहार में यह परियोजना इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय विकास के लिए नई दिशा प्रदान करेगी और राज्य की सड़क यात्रा को पूरी तरह बदल कर रख देगी।

 

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