HomeBreaking Newsओवैसी-हुमायूं का गठबंधन, क्या ममता बनर्जी के वोट बैंक पर लगेगा सेंध?

ओवैसी-हुमायूं का गठबंधन, क्या ममता बनर्जी के वोट बैंक पर लगेगा सेंध?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल सामने आ रही है।  AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने साथ आने का फैसला किया है। ईद के मौके पर दोनों नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर इस गठबंधन की पुष्टि की, जबकि इसकी औपचारिक घोषणा 25 मार्च को कोलकाता में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की जाएगी। इस गठबंधन को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

TMC से अलग होकर बना नया राजनीतिक चेहरा

हुमायूं कबीर, जो कभी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे, बाबरी मस्जिद से जुड़े विवादित बयान के बाद पार्टी से सस्पेंड कर दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने दिसंबर 2025 में अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ बनाई। शुरुआत से ही उन्होंने AIMIM के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे, हालांकि बीच में पार्टी के अंदर से विरोधाभासी बयान भी सामने आए थे। अब दोनों पक्षों के बीच गठबंधन स्पष्ट हो चुका है।

सीट शेयरिंग और चुनावी रणनीति

इस गठबंधन के तहत हुमायूं कबीर की पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि AIMIM करीब 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर और नौदा सीटों से चुनाव मैदान में उतरेंगे। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी मौजूदा भरतपुर सीट छोड़ दी है।

हाई प्रोफाइल सीटों पर सीधा मुकाबला

गठबंधन ने भवानीपुर और नंदीग्राम जैसी हाई प्रोफाइल सीटों पर भी उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। भवानीपुर से पूनम बेगम को मैदान में उतारा गया है, जहां से ममता बनर्जी विधायक हैं, जबकि नंदीग्राम में भी इस गठबंधन ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

मुस्लिम वोट बैंक पर सीधा फोकस

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27 से 30 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, जो कई जिलों और सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है। मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में यह प्रभाव और अधिक है। ओवैसी और कबीर का गठबंधन इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 2020 के बिहार चुनाव में AIMIM को सफलता मिलने के बाद ओवैसी ने बंगाल में भी पैर जमाने की कोशिश की थी, लेकिन 2021 विधानसभा चुनाव में उन्हें कोई सीट नहीं मिली और वोट शेयर भी सीमित रहा। ऐसे में इस बार हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन से क्या फर्क पड़ेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

ममता बनर्जी की रणनीति भी साफ

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने में जुटी हैं। ईद के मौके पर उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए घुसपैठ और धर्म की राजनीति को लेकर तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी लगातार खुद को सेक्युलर राजनीति के चेहरे के तौर पर पेश करती रही हैं।

पश्चिम बंगाल में त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला अब तक भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच माना जाता रहा है, लेकिन ओवैसी-कबीर गठबंधन की एंट्री से चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन कितना प्रभावी होगा, यह चुनाव नतीजों पर ही निर्भर करेगा।

Read More

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, गेहूं का MSP बढ़ाने सहित कई अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments