दिल्ली में यमुना नदी पर बने ऐतिहासिक लोहे के पुल की जगह अब आधुनिक तकनीक से तैयार नया रेलवे पुल शुरू होने जा रहा है। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडे के मुताबिक यह पुल पुराने पुल से 4.5 मीटर ऊंचा है, जिससे बाढ़ के दौरान भी रेल संचालन प्रभावित नहीं होगा।
पुराने पुल की सीमाओं से मिल गई राहत
करीब 150 साल पुराने लोहे के पुल की संरचना समय के साथ कमजोर हो चुकी थी। हर साल जलस्तर बढ़ने पर ट्रेनों को रोकना पड़ता था या बेहद धीमी गति से चलाना पड़ता था। इससे यात्रियों को परेशानी होती थी और समय भी ज्यादा लगता था। नया पुल इन सभी समस्याओं का समाधान लेकर आया है।
ऐतिहासिक ‘लोहा पुल’ अब सेवा से बाहर
दिल्ली और शाहदरा के बीच बना यह ऐतिहासिक पुल अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। कभी यह उत्तर और पूर्व भारत को जोड़ने वाली अहम कड़ी था, लेकिन लंबे समय तक भारी दबाव झेलने के बाद इसकी क्षमता घट गई थी।
19वीं सदी की इंजीनियरिंग का अनूठा नमूना
1866-67 में लगभग 3,500 टन रॉट आयरन से बने इस पुल पर 1867 में पहली बार भाप इंजन चला था। करीब 1000 फीट लंबा यह पुल उस दौर की इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण था, जिसने दिल्ली को कोलकाता से जोड़कर व्यापार और परिवहन में नई क्रांति लाई थी।
नया पुल देगा तेज, सुरक्षित और निर्बाध सफर
नया रेलवे पुल आधुनिक तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे ट्रेनें तेज गति से चल सकेंगी और रेल यातायात अधिक सुरक्षित व सुगम होगा। इस नए पुल के चालू होने से न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई भी तेज और बेहतर होगी। रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी।
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