कांग्रेस पार्टी को उसके ऐतिहासिक दफ्तरों को लेकर फिलहाल राहत मिल गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress Delhi Office) को ‘24 अकबर रोड’ स्थित मुख्यालय और ‘5 रायसीना रोड’ स्थित यूथ कांग्रेस कार्यालय को तत्काल खाली नहीं करना पड़ेगा। इससे पहले संपदा विभाग की ओर से पार्टी को 28 मार्च तक दोनों बंगले खाली करने का नोटिस दिया गया था।
हालांकि अब संबंधित केंद्रीय विभाग की ओर से कांग्रेस को अस्थायी राहत प्रदान की गई है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। जल्द ही पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं, ऐसे में इसे सरकार की एक रणनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा रहा है।
संपदा विभाग ने दिए थे निर्देश
संपदा विभाग द्वारा जारी नोटिस में कांग्रेस से उसके मुख्यालय के साथ-साथ ‘5 रायसीना रोड’ स्थित भारतीय युवा कांग्रेस कार्यालय को भी खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इस पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि यह कदम पार्टी की आवाज दबाने की कोशिश है।
गौरतलब है कि कांग्रेस पहले ही अपना नया मुख्यालय कोटला मार्ग स्थित ‘इंदिरा भवन’ में स्थानांतरित कर चुकी है। पिछले वर्ष सोनिया गांधी ने इस नए कार्यालय का उद्घाटन किया था। हालांकि, नए भवन में शिफ्ट होने के बावजूद पार्टी ने ‘24 अकबर रोड’ परिसर को खाली नहीं किया था।
क्या है ‘24 अकबर रोड’ का ऐतिहासिक महत्व ?
दिल्ली का ‘24 अकबर रोड’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। ब्रिटिश काल में यह आवास वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास हुआ करता था। बाद में 1960 के दशक में यह म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) की राजदूत खिन क्यी का निवास बना। उनकी पुत्री आंग सान सू की ने भी अपने जीवन के कुछ वर्ष इसी भवन में बिताए थे।
कांग्रेस के लिए क्यों खास है यह बंगला
इस भवन का सबसे अहम अध्याय 1970 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ। 1977 के आम चुनाव में हार और पार्टी में विभाजन के बाद इंदिरा गांधी को अपने गुट के संचालन के लिए नए ठिकाने की आवश्यकता थी। उस समय उनके करीबी सहयोगी जी. वेंकटस्वामी ने अकबर रोड स्थित अपना आवास इसके लिए उपलब्ध कराया था।