जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को जम्मू के एमए स्टेडियम से “ड्रग-फ्री जम्मू-कश्मीर” के लिए एक बड़े जन आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह अभियान केंद्रशासित प्रदेश के हर गांव, कस्बे और शहर तक पहुंचाया जाएगा, ताकि नशा-मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
छह चरणों में चलेगा अभियान
एलजी सिन्हा ने बताया कि अगले तीन महीने इस अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इस दौरान छह चरणों में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनमें युवाओं की भागीदारी, सामुदायिक सहयोग, सख्त कार्रवाई, पुनर्वास और निरंतर मूल्यांकन पर विशेष जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि नशा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर मामले के पीछे एक परिवार की पीड़ा छिपी होती है। इसलिए यह समस्या पूरे समाज की है और इसका समाधान भी सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
तस्करों पर कड़ी कार्रवाई का ऐलान
एलजी ने साफ किया कि नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि तस्करों की संपत्ति जब्त की जाएगी, बैंक खाते फ्रीज होंगे और पासपोर्ट, लाइसेंस व आधार जैसे दस्तावेज भी रद्द किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा पार से भी नशा तस्करी को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायतों, मोहल्ला समितियों और स्थानीय तंत्र की मदद से जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क को मजबूत किया जाए, ताकि हर दोषी की पहचान कर सख्त कार्रवाई हो सके।
युवाओं से जुड़ने की अपील
एलजी ने युवाओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिलाओं से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यही वर्ग इस आंदोलन की असली ताकत बनेगा। अभियान के तहत खेल प्रतियोगिताएं, वाद-विवाद, क्विज, पदयात्राएं और मैराथन आयोजित की जाएंगी, ताकि युवाओं को नशे से दूर रखा जा सके और जागरूकता बढ़े। एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी अभियान है, जो जम्मू-कश्मीर को नशा-मुक्त बनाने की मजबूत नींव रखेगा।
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