Wednesday, March 4, 2026
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खामेनेई का बेटा मोजतबा खामेनेई बना ईरान का नया सुप्रीम लीडर, वर्चुअल बैठक में हुआ फैसला

मोजतबा खामेनेई
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ईरान की विशेषज्ञ सभा ने बुधवार को अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुने जाने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह निर्णय देश की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के दबाव में लिया गया।

वर्चुअल मीटिंग में हुआ फैसला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति के कारण विशेषज्ञ सभा की पूर्ण बैठक आयोजित नहीं हो सकी। ऐसे में सदस्यों के बीच वर्चुअल मीटिंग और आंतरिक परामर्श के जरिए नए सुप्रीम लीडर के चयन का निर्णय लिया गया।

सूत्रों का कहना है कि IRGC ने कट्टरपंथी धार्मिक और राजनीतिक गुटों को एकजुट कर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में माहौल तैयार किया। मोजतबा लंबे समय से अपने पिता के करीबी सहयोगी रहे हैं और सुरक्षा तंत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं। हालांकि वे सार्वजनिक रूप से ज्यादा सक्रिय नहीं रहे, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हें ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में प्रभावशाली माना जाता है।

वे IRGC और बसिज मिलिशिया से भी करीबी संबंध रखते हैं, जिसके कारण उन्हें सत्ता संरचना में मजबूत समर्थन मिला।

नियुक्ति पर उठ रहे सवाल

मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को लेकर ईरान के भीतर भी विवाद की संभावना जताई जा रही है। ईरान की इस्लामी क्रांति की विचारधारा वंशानुगत सत्ता के खिलाफ रही है, इसलिए आलोचक इसे “राजशाही जैसी व्यवस्था” की ओर कदम मान सकते हैं।

इसके अलावा मोजतबा की धार्मिक रैंक ‘हुज्जतुल इस्लाम’ को सर्वोच्च नेता पद के लिए कम माना जाता है। हालांकि IRGC के समर्थन ने उनके चयन को संभव बनाया।

28 फरवरी को हुई थी अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत

ईरान के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में मौत हो गई थी। इसके बाद देश में अस्थायी रूप से तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद ने सत्ता संभाली थी, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक ज्यूरिस्ट शामिल थे।

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